क्या विमानों के फ्यूल में मिलाया जा सकता है एथेनॉल, गाड़ियों की ब्लेंडिंग से कितना अलग?

Ethanol in Aviation Fuel: हाल ही में नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने यह साफ किया है कि एवियशन फ्यूल में एथेनॉल नहीं मिलाया जाएगा. गाड़ियों में इस्तेमाल होने वाले पेट्रोल के उलट विमान में एथेनॉल नहीं डाला जा सकता. ऐसा इसलिए क्योंकि इसके लिए सुरक्षा और परफॉर्मेंस की कड़ी जरूरत होती है. आइए जानते हैं कि एवियशन फ्यूल गाड़ियों में इस्तेमाल होने वाले एथेनॉल ब्लेंडिंग से कैसे अलग है.
एवियशन फ्यूल में एथेनॉल की ब्लेंडिंग नहीं की जाएगी. सरकार ने यह साफ किया है कि कच्चे एथेनॉल को सीधे एविएशन टर्बाइन फ्यूल के साथ नहीं मिलाया जाएगा.
एविएशन सेक्टर सस्टेनेबल एवियशन फ्यूल का इस्तेमाल करेगा. इसे एथेनॉल या फिर दूसरे बायोमास को जेट फ्यूल जैसे हाइड्रोकार्बन में बदलकर बनाया जाता है.
गाड़ियों में इस्तेमाल होने वाले पेट्रोल में सीधे एथेनॉल मिलाया जा सकता है क्योंकि वह अलग तरह से काम करता है. जैसे भारत का ई-20 फ्यूल जिसमें 20% एथेनॉल होता है.
सस्टेनेबल एवियशन फ्यूल को पारंपरिक एविएशन टर्बाइन फ्यूल की खूबियों से मेल खाने के लिए डिजाइन किया गया है. इससे इसे विमान के इंजन बदले बिना इस्तेमाल किया जा सकता है.
विमान -40 डिग्री सेल्सियस से -47 डिग्री सेल्सियस तक के कम तापमान पर उड़ते हैं. जहां नमी रोकने की वजह से कच्चा एथेनॉल जम सकता है और इंजन को नुकसान पहुंचा सकता है.
सीधे एथेनॉल मिलाने से फ्यूल की एनर्जी डेंसिटी कम हो जाती है. इससे उड़ान के दौरान इंजन की परफॉर्मेंस कम होने का खतरा बढ़ जाता है
इस्तेमाल से पहले सस्टेनेबल एवियशन फ्यूल को ICAO मंजूर ASTM स्पेसिफिकेशन के तहत तय कड़े इंटरनेशनल सुरक्षा और क्वालिटी स्टैंडर्ड को पूरा करना होगा.
सरकार का लक्ष्य 2027 तक इंटरनेशनल उड़ानों में एक प्रतिशत सस्टेनेबल एवियशन फ्यूल ब्लेंड हासिल करना है. यह सड़क परिवहन के लिए ई-20 इथेनॉल ब्लेंडिंग लक्ष्य से काफी कम है.