Rules For Muslim Widow: विधवा होने के बाद मुस्लिम महिलाओं को करना होता है ये काम, बेहद सख्त होते हैं नियम

Rules For Muslim Widow: शादी दो लोगों के बीच का पवित्र बंधन माना गया है. भारत में शादी करना और इससे जुड़े सबके लिए अलग-अलग नियम तय हैं. जैसे कि हिंदू धर्म में शादी सात फेरों के साथ संपन्न होती है, ऐसे ही मुस्लिम धर्म में निकाह किया जाता है. हर महिला शादी के बाद अपने पति के साथ खुश रहना चाहती है. कोई नहीं चाहता कि उसका पति हमेशा के लिए उसका साथ छोड़कर चला जाए. लेकिन अगर इस्लाम में कोई महिला विधवा हो जाती है तो उसके लिए बड़े ही सख्त नियम हैं.
मुस्लिम में जिस महिला का पति मर गया हो तो उसके लिए इद्दत नाम से इंतजार करने का वक्त होता है. यह पति की मौत के बाद 4 महीने 10 दिन यानि 128 दिन का होता है.
इद्दत एक ऐसी अवधि है जो पति की मृत्यु या तलाक के बाद महिलाओं के लिए निर्धारित की गई है.
इद्दत का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अगर पति या पत्नी की मृत्यु या अलगाव से पहले कोई गर्भावस्था हुई हो, तो उस गर्भावस्था के पितृत्व को स्पष्ट रूप से पहचाना जा सके.
अगर कोई महिला गर्भवती है, तो इद्दत तब तक चलती है जब तक वह बच्चे को जन्म नहीं दे देती है.
एक मुस्लिम वेबसाइट की मानें तो इस दौरान उस महिला को शोक मनाना चाहिए. उसे सोना, इत्र या भगवा रंग का कपड़ा नहीं पहनना चाहिए.
विधवा हुई महिला शोक मनाते समय श्रृंगार, इत्र, काजल, त्वचा क्रीम (जब तक कि उसके पास इसका उपयोग करने का कोई वैध बहाना न हो), मेंहदी, तथा कुसुम और केसर से रंगे कपड़ों से परहेज करती है.
पति की मृत्यु के बाद विधवाएं 40 दिन तक सफेद कपड़े पहनती हैं. ऐसा वे शोक मनाने के लिए करती हैं.