क्यों खामोश हो गई रोजा खोलने वाली सऊदी अरब की 'रमजान तोप', क्या है इसका इतिहास?

सऊदी अरब में रमजान के दौरान पारंपरिक रमजान तोप का चलन सदियों पुराना है. यह तोप रमजान और ईद अल-फितर की शुरुआत की घोषणा करती है, लेकिन हाल ही में इसे खामोश पाया गया, और इस खामोशी के पीछे सिर्फ तकनीकी बदलाव नहीं बल्कि मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव और सुरक्षा चिंताएं भी हैं. ईरान और सऊदी अरब के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है. रियाद ने ईरान को चेतावनी दी है कि अगर उसके इलाके पर हमला किया गया या इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचाया गया, तो वह पलटवार करेगा. ऐसे में आइए जानते हैं कि सऊदी अरब की रोजा खोलने वाली रमजान तोप का इतिहास क्या है.
रमजान तोप एक प्रकार की प्राचीन तोप है जिसे रमजान और ईद के महीनों की शुरुआत की घोषणा करने के लिए यूज किया जाता था. इस तोप के गोले बड़े ऊंचे स्थान जैसे पहाड़ या किलों से दागे जाते थे ताकि पूरे इलाके में आवाज सुनाई दे. यह एक तरह से लोगों को यह सूचित करती थी कि रोजा खोलने का समय हो गया है या ईद का महीना शुरू हो गया है.
सऊदी अरब में रमजान तोप का इस्तेमाल 1865 में शुरू हुआ था. उस समय द्वितीय सऊदी राज्य के इमाम फैसल बिन तुर्की बिन अब्दुल्ला ने इसे अल-धैरेन किले (जो आज का अल-मरकाब किला है) में स्थापित किया. इसका मुख्य उद्देश्य था ग्रैंड मस्जिद के आस-पास के लोगों को रोजा खोलने और रमजान के महीनों की शुरुआत की सूचना देना.
1921 में, सऊदी अरब के संस्थापक राजा अब्दुलअजीज बिन अब्दुल रहमान अल सऊद ने शुऐब अल-दोसारी को इस तोप की देखरेख का जिम्मा सौंपा. रोजाना रमजान के महीने में 150 गोले दागे जाते थे. एक गोला इफ्तार का समय बताने के लिए, एक सुहूर के समय के लिए और दो रोजा शुरू होने के लिए, ईद पर तोप की गतिविधि खत्म होती थी और उपकरण अगले साल के लिए सुरक्षित रखे जाते थे.
मक्का में, जबल अल-मदाफाई नामक पर्वत से यह तोप दागी जाती थी, जो ग्रैंड मस्जिद की तरफ देखता था. मदीना में, सेला पर्वत से ईद, रमजान और ईद-अल-अधा की घोषणाएं होती थीं. इस वजह से तोपों का काम धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व दोनों रखता था.
2014 में मक्का मुकर्रमा में ग्रैंड मस्जिद में लाउडस्पीकरों का बढ़ता यूज होने लगा. लोगों को रोजा खोलने और नमाज के समय की सूचना अब स्पीकर के माध्यम से मिलने लगी. इस वजह से मक्का में रमजान तोपों का संचालन स्थगित कर दिया गया, लेकिन 2015 में राजा सलमान बिन अब्दुलअजीज अल सऊद ने मदीना में इसे फिर से शुरू करने का आदेश दिया.
रमजान तोप सिर्फ एक घोषणा उपकरण नहीं बल्कि सऊदी अरब की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा का हिस्सा है. यह लोगों के लिए रोजा और इबादत की याद दिलाती है, आज भी यह परंपरा रमजान और ईद के महीनों में बड़े सम्मान और उत्साह के साथ निभाई जाती है.