Oil Production Cost: तेल के कुएं से तेल निकालने में कितना आता है खर्च, जानें भारत में क्या है उत्पादन की लागत?

Oil Production Cost: मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव का असर होर्मुज स्ट्रेट पर पड़ा है. इस वजह से क्रूड ऑयल की कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है. इसी बीच आइए जानते हैं कि कच्चे तेल को जमीन से निकलने में कितना खर्चा आता है और भारत में क्या आती है उत्पादन लागत.
ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन के मुताबिक भारत में कच्चा तेल बनाने की मौजूदा लागत लगभग 45 डॉलर प्रति बैरल है. यह तेल निकालने, ऑपरेशन और रेगुलेटरी शुल्कों के मिले-जुले बोझ को दिखाता है.
ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन अगले कुछ सालों में उत्पादन लागत में 15% की कमी लाने का लक्ष्य बना रहा है. इस योजना में ऑपरेशनल एफिशिएंसी में सुधार करना और एडवांस तकनीकों को अपनाना शामिल है. इससे लगभग ₹9000 करोड़ की बचत होने का अनुमान है.
तेल निकालने का काम बड़े पैमाने पर भू वैज्ञानिक सर्वे और ड्रिलिंग ऑपरेशन से शुरू होता है. लागत इस बात पर निर्भर होती है कि तेल का कुआं जमीन पर है या फिर समुद्र में. समुद्र में ड्रिलिंग करना काफी ज्यादा चुनौती वाला होता है और इसी वजह से महंगा भी होता है.
रोजमर्रा के ऑपरेशन जैसे कि उपकरणों का रखरखाव, कर्मचारियों का वेतन और परिवहन लागत वित्तीय बोझ डालते रहते हैं.
रॉयल्टी, सेस और सरकारी टैक्स जैसे वैधानिक शुल्क भारत में तेल उत्पादन के लागत को काफी बढ़ा देते हैं. इन खर्चों की वजह से कम टैक्स बोझ वाले देशों की तुलना में यहां तेल निकालना काफी ज्यादा महंगा हो जाता है.
एनहैंस्ड तेल रिकवरी जैसी तकनीक का इस्तेमाल पुराने या फिर मुश्किल कुओं से तेल निकालने के लिए किया जाता है. लेकिन यह काफी ज्यादा महंगी तकनीक होती है. हालांकि इनसे उत्पादन बढ़ता है लेकिन ये लागत को भी बढ़ा देती हैं. इसी के साथ भौगोलिक स्थिति और संसाधन की उपलब्धता भी लागत में बड़ा अंतर डालती है. सऊदी अरब जैसे देश में दो डॉलर से भी कम उत्पादन लागत आती है, वहीं भारत जैसे देश में यह कीमत 45 डॉलर पहुंच जाती है.