LPG Price Hike: अमेरिका, चीन और पाकिस्तान में कितने का मिलता है एक सिलेंडर, क्या भारत में सच में सबसे सस्ती है LPG?

LPG Price Hike: 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में ₹29 की बढ़ोतरी की गई है. सरकार ने इस बढ़ोतरी की वजह पश्चिम एशिया में बढ़ते भू राजनीतिक तनाव और ग्लोबल एनर्जी सप्लाई में संभावित रूकावटों को बताया है. कीमत बढ़ने के बावजूद पेट्रोलियम मंत्रालय का यह कहना है कि भारत में अब भी घरेलू उपभोक्ताओं को दुनिया और पड़ोसी देशों की तुलना में सस्ती गैस मिल रही है. इसी बीच आइए जानते हैं कि अमेरिका, चीन और पाकिस्तान जैसे देशों में एलपीजी की क्या कीमत है.
हालांकि घरेलू एलपीजी की कीमतों में ₹29 की बढ़ोतरी हुई है इसके बावजूद भी भारतीय उपभोक्ताओं को सरकार से काफी मदद मिलती है. एक स्टैंडर्ड 14.2 किलोग्राम सिलेंडर की कीमत लगभग ₹942 है. इसी के साथ प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को ₹30 की सब्सिडी के बाद यही सिलेंडर लगभग ₹642 का मिलता है.
यह कहानी पूरी तरह से सही नहीं है कि भारत दुनिया में सबसे सस्ती एलपीजी देता है. हालांकि सरकारी सब्सिडी यह पक्का करती है कि भारतीय परिवारों को असल इंटरनेशनल मार्केट की कीमत से काफी कम कीमत चुकानी पड़े. इससे कई मामलों में एलपीजी ग्लोबल दरों की तुलना में 45% से 60% तक सस्ती हो जाती है.
पाकिस्तान में 11.8 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत भारतीय मुद्रा में लगभग ₹1046 के बराबर है. बार-बार गैस की कमी और आर्थिक चुनौतियों की वजह से उपभोक्ताओं को अक्सर लोकल मार्केट और अनौपचारिक सप्लाई चैनल से और भी ज्यादा कीमतों पर सिलेंडर खरीदने पड़ते हैं.
चीनी उपभोक्ता आमतौर पर 15 किलोग्राम एलपीजी सिलेंडर के लिए ₹1000 से ₹1100 के बीच भुगतान करते हैं. भारत के उलट जहां सब्सिडी बड़ी भूमिका निभाती है चीन में एलपीजी की कीमत लोकल टैक्स नीति, ट्रांसपोर्टेशन लागत और कमर्शियल डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क से तय होती है.
अमेरिका में एलपीजी सिलेंडर की कीमत भारतीय मुद्रा में बदलने पर आमतौर पर ₹1500 से ₹1755 के बीच होती है. नेचुरल गैस का बड़ा उत्पादक होने के बावजूद देश में पूरी तरह से कमर्शियल प्राइसिंग मॉडल और टैक्स स्ट्रक्चर की वजह से ग्राहकों को काफी ज्यादा कीमत चुकानी पड़ती है.
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा इंपोर्ट करता है. इससे घरेलू एलपीजी की कीमतें अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों से प्रभावित होती हैं. पश्चिम एशिया में टकराव, शिपिंग रूट में रुकावट और कच्चे तेल की कीमतों में उतार चढ़ाव की वजह से देश भर में कुकिंग गैस की कीमत पर सीधा असर पड़ सकता है.