बिना बिजली के चलती थी दुनिया की पहली लिफ्ट, जानिए इसे बनाने में कितने रुपये हुए थे खर्च?
अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर में स्थित ब्रॉडवे के 'ई.वी. हॉगवॉट डिपार्टमेंट स्टोर' (E.V. Haughwout Store) में 23 मार्च 1857 को दुनिया की पहली यात्री लिफ्ट स्थापित की गई थी. उस समय पांच मंजिला यह इमारत न्यूयॉर्क की सबसे आधुनिक इमारतों में से एक मानी जाती थी.
इस लिफ्ट को बनाने और स्थापित करने में उस दौर के हिसाब से लगभग 2,500 डॉलर यानि 2,29,975 रुपये खर्च हुए थे. हालांकि आज यह राशि कम लग सकती है, लेकिन 19वीं सदी के मध्य में यह एक बहुत बड़ी पूंजी थी, जो भविष्य की तकनीक पर लगाया गया एक साहसी दांव था.
हैरानी की बात यह है कि उस समय लिफ्ट को चलाने के लिए बिजली की मोटरें नहीं थीं. इमारत के बेसमेंट में एक विशाल स्टीम इंजन लगाया गया था, जो बेल्ट और पुली के जरिए लिफ्ट को ऊपर-नीचे खींचता था. यह पहली लिफ्ट बहुत धीमी गति से चलती थी, इसकी रफ्तार महज 40 फीट प्रति मिनट थी.
यानी आज की एक सामान्य लिफ्ट जितनी देर में 10-12 मंजिलें चढ़ जाती है, उतनी देर में यह पहली लिफ्ट महज एक या दो मंजिल ही चढ़ पाती थी. फिर भी, यह उस समय के लिए किसी जादू से कम नहीं था. लिफ्ट के आविष्कारक एलिशा ग्रेव्स ओटिस (Elisha Otis) जानते थे कि लोग हवा में लटकने से डरते हैं. उन्हें डर था कि अगर रस्सी टूट गई तो लिफ्ट सीधे जमीन पर गिर जाएगी.
इसी डर को दूर करने के लिए ओटिस ने एक रैचेट सेफ्टी लॉक का आविष्कार किया. यह एक ऐसा सुरक्षा तंत्र था जो रस्सी टूटने की स्थिति में ऑटोमैटिकली एक्टिव होकर लिफ्ट को उसी जगह लॉक कर देता था. ओटिस ने एक प्रदर्शनी के दौरान खुद लिफ्ट के अंदर खड़े होकर उसकी रस्सी कटवा दी थी, लेकिन सेफ्टी लॉक की वजह से वह नहीं गिरी. इसी भरोसे ने लोगों को लिफ्ट का इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित किया.
इस लिफ्ट के आने से पहले दुनिया भर की इमारतों की ऊंचाई सीमित होती थी. लोग ज्यादा से ज्यादा 4 या 5 मंजिल ही बनाना पसंद करते थे, क्योंकि सीढ़ियां चढ़ना थकाऊ होता था. जैसे ही सुरक्षित लिफ्ट का विचार सफल हुआ, आर्किटेक्ट्स और बिल्डर्स को पंख मिल गए. इसके बाद ही दुनिया में ऊंची इमारतों और 'स्काईस्क्रेपर्स' का निर्माण शुरू हुआ.
लिफ्ट ने केवल सामान या इंसानों को ऊपर नहीं पहुंचाया, बल्कि जमीन की कीमत को भी आसमान पर पहुंचा दिया, क्योंकि अब सबसे ऊपरी मंजिल सबसे महंगी और प्रतिष्ठित हो गई. भाप से चलने वाली यह पहली लिफ्ट लगभग तीन दशकों तक चलन में रही. 1880 के दशक में जैसे-जैसे बिजली का इस्तेमाल बढ़ा, हाइड्रोलिक और फिर इलेक्ट्रिक लिफ्ट ने इसकी जगह ले ली.