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घर में मच्छर पनपते मिले तो लगता है इतना जुर्माना, कितने साल पुराना है यह सिस्टम?

नेहा सिंह   |  19 Aug 2025 01:15 PM (IST)
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इन बीमारियों को रोकने के लिए भारत के कई शहरों में स्थानीय प्रशासन ने सख्त नियम लागू किए हैं, जिसमें घरों में मच्छरों के प्रजनन स्थल पाए जाने पर जुर्माना लगाया जाता है. लेकिन यह सिस्टम कितना पुराना है और इसके पीछे की वजह क्या है? चलिए इसके बारे में जानते हैं.

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भारत में मच्छरों से होने वाली बीमारियों को नियंत्रित करने के लिए कई नगर निगमों और स्थानीय निकायों ने मच्छरों के प्रजनन को रोकने के लिए नियम बनाए हैं.

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घरों में जमा पानी जैसे कि कूलर, गमले, टायर या खुले बर्तनों में पानी को मच्छरों का प्रजनन स्थल माना जाता है. अगर नगर निगम या स्वास्थ्य विभाग की टीम को निरीक्षण के दौरान किसी घर में मच्छरों के लार्वा मिलते हैं, तो मकान मालिक पर जुर्माना लगाया जा सकता है.

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जुर्माने की राशि शहर और नियमों के आधार पर अलग-अलग हो सकती है. उदाहरण के लिए, दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु जैसे महानगरों में यह जुर्माना 500 रुपये से लेकर 5,000 रुपये तक हो सकता है. कुछ मामलों में, बार-बार उल्लंघन करने पर यह राशि बढ़ भी सकती है.

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कुछ शहरों में जैसे कि दिल्ली नगर निगम (MCD) के नियमों के तहत, अगर घर में डेंगू के मच्छरों के लार्वा पाए जाते हैं, तो 2,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है. वहीं, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लिए यह राशि और भी अधिक हो सकती है.

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यह सिस्टम भारत में कई साल पुराना है. दिल्ली में मच्छरों के प्रजनन को रोकने के लिए चालान शुल्क की व्यवस्था करीब 50 साल पुरानी है. वर्ष 1975 में यह राशि अधिकतम 500 रुपये निर्धारित की गई थी. जो बाद में समय के साथ परिवर्तित होती गई.

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हाल के वर्षों में डेंगू और चिकनगुनिया के बढ़ते मामलों के कारण यह नियम और सख्त किए गए. नगर निगम की टीमें अब नियमित रूप से घरों, स्कूलों और कार्यालयों का निरीक्षण करती हैं. अगर कहीं मच्छरों के लार्वा मिलते हैं, तो पहले नोटिस जारी किया जाता है और फिर जुर्माना लगाया जाता है.

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