तलाश कर थक जाएंगे पर नहीं मिलेगा एक भी गरीब, जानिए उस देश का रसूख जहां कोई महरूम नहीं रहता
स्विट्जरलैंड में अत्यधिक गरीबी का न मिलना कोई इत्तेफाक नहीं, बल्कि वहां की सरकार की सोची-समझी नीति है. हालांकि वहां कम आय वाले लोग मौजूद हैं, लेकिन सरकार की सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था इतनी पुख्ता है कि कोई भी व्यक्ति बुनियादी सुविधाओं जैसे भोजन और छत के लिए नहीं तड़पता है.
जरूरतमंद लोगों को समय पर आर्थिक सहायता, विशेष भत्ते और अन्य जरूरी सुविधाएं मुहैया कराई जाती हैं, ताकि समाज का सबसे निचला तबका भी सम्मानजनक और गरिमापूर्ण जीवन जी सके.
इस देश की सबसे बड़ी खूबी इसका बेरोजगारी बीमा है. अगर किसी नागरिक की नौकरी चली जाती है, तो वह सड़क पर नहीं आता है. सरकार उसे पिछले वेतन का लगभग 70 से 80 प्रतिशत हिस्सा बेरोजगारी भत्ते के रूप में एक निश्चित समय तक देती रहती है.
इतना ही नहीं, प्रशासन केवल पैसा देकर चुप नहीं बैठता, बल्कि उस व्यक्ति को नई नौकरी दिलाने के लिए विशेष ट्रेनिंग और कौशल विकास कार्यक्रम भी चलाता है, जिससे वह दोबारा मुख्यधारा में लौट सके.
स्विट्जरलैंड में घर का किराया देना किसी के लिए बोझ न बने, इसके लिए स्थानीय प्रशासन और सरकार मिलकर काम करते हैं. वहां बड़े पैमाने पर हाउसिंग कोऑपरेटिव और सब्सिडी योजनाएं चलाई जाती हैं, जो मध्यम और कम आय वाले परिवारों को बेहद सस्ती दरों पर मकान उपलब्ध कराती हैं.
वहां सरकार यह सुनिश्चित करती है कि देश के किसी भी कोने में कोई भी व्यक्ति बिना छत के न सोए, यही कारण है कि वहां झुग्गी-झोपड़ियों का नामोनिशान तक नहीं मिलता है.
स्वास्थ्य के मामले में स्विट्जरलैंड दुनिया के सबसे सख्त और सुरक्षित देशों में से एक है. यहां हर नागरिक के लिए हेल्थ इंश्योरेंस लेना कानूनी रूप से अनिवार्य है. जो लोग प्रीमियम भरने में सक्षम नहीं होते, सरकार उन्हें मोटी सब्सिडी देती है ताकि इलाज हर किसी की पहुंच में रहे.
इस व्यवस्था के कारण वहां का हर व्यक्ति, चाहे वह अमीर हो या कम आय वाला, दुनिया की बेहतरीन चिकित्सा सुविधाओं का लाभ उठा पाता है और बीमारी की वजह से कर्ज के जाल में नहीं फंसता है. स्विट्जरलैंड अक्सर दुनिया के सबसे खुशहाल देशों की सूची में टॉप पर रहता है. इसकी वजह है वहां का ऊंचा जीवन स्तर और औसत वेतन.