Mohammad Ali Jauhar University: किसने बनवाई थी जौहर यूनिवर्सिटी, कितना पैसा हुआ था खर्च?

मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय
मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी एक निजी विश्वविद्यालय है, जिसकी स्थापना 2006 में मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट के जरिए समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान ने उत्तर प्रदेश के रामपुर में की थी. यह यूनिवर्सिटी UGC से मान्यता प्राप्त है और आजम खान इसके चांसलर भी हैं. यूनिवर्सिटी का नाम खिलाफत आंदोलन के प्रमुख नेता मौलाना मोहम्मद अली जौहर के नाम पर रखा गया है, जो महात्मा गांधी के करीबी सहयोगी रहे थे.
आजम खान द्वारा बनवाई गई यह यूनिवर्सिटी काफी बड़े क्षेत्र में फैली हुई है. यूनिवर्सिटी का कैंपस करीब 121 हेक्टेयर यानी लगभग 300 एकड़ के ग्रामीण क्षेत्र में बना है. यहां वर्तमान में 3000 से ज्यादा छात्र पढ़ाई करते हैं. इतने बड़े कैंपस में कई शानदार इमारतें, हॉस्टल, प्रशासनिक भवन और अन्य सुविधाएं बनाई गई हैं, जिनकी वजह से इसके निर्माण खर्च को लेकर शुरू से ही सवाल उठते रहे हैं.
यूनिवर्सिटी के निर्माण में हुए खर्च को लेकर ट्रस्ट और सरकारी एजेंसियों के आंकड़ों में जमीन-आसमान का फर्क सामने आया है. जौहर ट्रस्ट ने दावा किया था कि यूनिवर्सिटी के निर्माण पर करीब 46 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं, जबकि केंद्रीय लोक निर्माण विभाग ने इसका मूल्यांकन करीब 494 करोड़ रुपये आंका. यानी सरकारी एजेंसी के अनुसार, जो खर्च ट्रस्ट ने बताया, असल खर्च उससे करीब दस गुना ज्यादा था.
मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, खर्च और यूनिवर्सिटी की कीमत को लेकर आंकड़े और भी चौंकाने वाले सामने आए. रिपोर्टों के अनुसार आजम खान ने महज 60 करोड़ रुपये के खर्च में 800 करोड़ रुपये से ज्यादा कीमत की जौहर यूनिवर्सिटी खड़ी कर दी, जो आयकर टीम के शुरुआती आकलन से भी कहीं ज्यादा थी. इस मूल्यांकन के लिए लखनऊ, मुरादाबाद और कानपुर से आयकर और सीपीडब्ल्यूडी की टीमें रामपुर पहुंची थीं.
खर्च के हिसाब-किताब में गड़बड़ी की आशंका को देखते हुए जांच एजेंसियां लगातार सक्रिय रहीं. आजम खान का जौहर ट्रस्ट आयकर विभाग को यूनिवर्सिटी के निर्माण में हुए अरबों रुपये के खर्च का ब्योरा नहीं दे पाया, जिसमें भारी मात्रा में काले धन के इस्तेमाल की आशंका जताई गई. इसी संदेह के आधार पर प्रवर्तन निदेशालय ने भी अपनी जांच शुरू की.