Lab Diamonds: क्या लैब में हीरा बना सकते हैं, नेचुरल प्रॉसेस की तुलना में इसमें कितना खर्च आता है?

Lab Diamonds: हीरे को कभी एक प्राकृतिक चमत्कार माना जाता था. यह अरबों सालो में धरती के अंदर काफी ज्यादा गर्मी और दबाव में बनते थे. लेकिन मॉडर्न साइंस ने इतनी ज्यादा तरक्की कर ली है कि हीरे लैब में भी बनाए जा सकते हैं. आइए जानते हैं कि नेचुरल प्रोसेस की तुलना में इसमें कितना खर्च आता है.
लैब में बने हीरे असली हीरे होते हैं नकली नहीं. उनका केमिकल कंपोजिशन, क्रिस्टल स्ट्रक्चर, कठोरता और चमक प्राकृतिक हीरों जैसी ही होती है. यहां तक की एक्सपर्ट जेमोलॉजिस्ट को भी उन्हें पहचान के लिए खास उपकरणों का इस्तेमाल करना पड़ता है.
हीरे हाई प्रेशर हाई टेंपरेचर या फिर केमिकल वेपर डिपोजिशन तरीकों से बनाए जाते हैं. दोनों ही प्राकृतिक हीरा बनाने वाले माहौल को दोहराते हैं. लेकिन कंट्रोल लैब की स्थितियों में अरबों सालों के बजाय हफ्तों में ही हीरे बन जाते हैं.
लैब में बने हीरे प्राकृतिक हीरों की तुलना में लगभग 80% से 95% सस्ते हैं. 1 कैरेट प्राकृतिक हीरे की कीमत ढाई लाख से 7 लाख रुपए तक हो सकती है. इसी क्वालिटी के लैब में बने हीरे की कीमत ₹20000 से ₹80000 के बीच होती है.
प्राकृतिक हीरों के लिए माइनिंग, ट्रांसपोर्टेशन, छंटाई और लंबी इंटरनेशनल सप्लाई चैन की जरूरत होती है. लैब में बने हीरे इन सबसे बच जाते हैं.
लैब में बने हीरे अवैध माइनिंग, कनफ्लिक्ट डायमंड और बड़े पैमाने पर पर्यावरणीय नुकसान जैसी समस्याओं से बचते हैं.
अपनी सुंदरता और किफायती होने के बावजूद लैब में बने हीरों की रीसेल और इन्वेस्टमेंट वैल्यू कम होती है. प्राकृतिक हीरे दुर्लभता और पारंपरिक बाजार की मांग की वजह से लंबे समय तक ज्यादा वैल्यू बनाए रखते हैं.