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कहां से कहां तक चलेगी हाईड्रोजन ट्रेन, जानें शताब्दी-वंदे भारत जैसी दूसरी ट्रेनों से कितनी है अलग?

एबीपी लाइव   |  11 Dec 2025 04:47 PM (IST)
कहां से कहां तक चलेगी हाईड्रोजन ट्रेन, जानें शताब्दी-वंदे भारत जैसी दूसरी ट्रेनों से कितनी है अलग?

भारतीय रेलवे अपनी ट्रेनों में क्रांतिकारी परिवर्तन कर रही है. शताब्दी, राजधानी और वंदेभारत जैसी तेज रफ्तार ट्रेनों के बाद अब भारत जल्द ही एक ऐसी तकनीक लेने वाला है जो देश की रेल प्रणाली को पर्यावरण के अनुकूल और आधुनिक बना देगी. भारतीय रेलवे अपनी पहली हाइड्रोजन-संचालित ट्रेन को शुरू करने की तैयारी में है जो शून्य प्रदूषण, कम शोर और बेहतर ऊर्जा के साथ पूरे देश में दौड़ेगी.

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भारतीय रेलवे ने Hydrogen Heritage Project के तहत बड़े स्तर पर हाइड्रोजन ट्रेनों को शामिल करने की तैयारी शुरू कर दी है. योजना के अनुसार रेलवे कुल 35 हाइड्रोजन ट्रेनों को चरणबद्ध तरीके से शुरू करेगी.

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भारत में हाइड्रोजन ट्रेन हरियाणा के जींद से सोनीपत के बीच दौड़ेगी जो लगभग 89 किलोमीटर के डिस्टेंस को कवर करेगी. भारतीय रेलवे के अनुसार, ये ट्रेन विश्व की सबसे बड़ी हाइड्रोजन ट्रेनों में से एक होगी जिसकी पैसेंजर कैपेसिटी लगभग 2600 यात्रियों के आसपास की होगी जो अपने आप में एक बड़ी बात है.

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भारतीय रेलवे ने हाइड्रोजन-संचालित ट्रेन के डब्बों और इंजन का इंटीग्रल कैरिज फैक्ट्री (आईसीएफ) जो चेन्नई में स्थित है का सफलतापूर्वक परीक्षण पूरा किया. भारत दुनिया का पांचवा देश बन जाएगा जिसने हाइड्रोजन-संचालित ट्रेन का विकास किया. इससे पहले चीन, स्वीडन, फ्रांस और जर्मनी में हाइड्रोजन-संचालित ट्रेन का उपयोग किया जा रहा है.

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भारत की सबसे आधुनिक ट्रेन वंदेभारत है लेकिन अगर वंदेभारत और हाइड्रोजन ट्रेन की तुलना करें तो दोनों अलग-अलग उद्देश्यों और टेक्नोलॉजी वाली ट्रेनें हैं; वंदेभारत बिजली से चलने वाली, आधुनिक सुविधाएं और तेज गति वाली है जबकि हाइड्रोजन ट्रेन पर्यावरण के लिए बेहतर, शून्य प्रदूषण, कम शोर और बेहतर ऊर्जा दक्षता के साथ चलेगी.

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भारतीय रेलवे की यह नई हाइड्रोजन ट्रेन 1,200 हॉर्सपावर के इंजन से लैस है जो इसे दुनिया की सबसे शक्तिशाली हाइड्रोजन-संचालित ट्रेन बनाती है. यह न सिर्फ भारत की इंजीनियरिंग क्षमता का बड़ा प्रदर्शन है.

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सूत्रों के मुताबिक हाइड्रोजन ट्रेन के टिकट की कीमत ज्यादा नहीं होगी जिसे मध्यम वर्गीय व्यक्ति भी इस ट्रेन में सफर कर पाएंगे और जेब पर ज्यादा बोझ भी नहीं आएगा.

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हर ट्रेन पर लगभग 80 करोड़ रुपये का खर्च आएगा जबकि इनके संचालन के लिए जरूरी ग्राउंड इंफ्रास्ट्रक्चर पर करीब 70 करोड़ रुपये प्रति लोकेशन का खर्चा आएगा.

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