अब ट्रेनों में क्यों नजर नहीं आते मिलिट्री कोच, क्या है इन्हें हटाने की वजह?
ट्रेनों में मिलिट्री कोचों की संख्या कम होने का सबसे बड़ा कारण कोचों की कम उपलब्धता है. यानी ये कोच आसानी से उपलब्ध नहीं हो पाते थे. कई बार ऐसा होता था कि ट्रेन में लगे ये मिलिट्री कोच उस ट्रेन में मौजूद ही नहीं होते थे, क्योंकि इन कोचों का रखरखाव अलग से किया जाता था
किसी भी ट्रेन में लगा मिलिट्री कोच पूरी ट्रेन से अलग नजर आता था, क्योंकि इस कोच का रंग और उस पर लगे सिंबल इसे बाकी ट्रेन के कोचों से अलग दिखाते थे. यह सुरक्षा की दृष्टि से भी ठीक नहीं माना जाता था.
ट्रेन के कोचों में आसानी से मिलिट्री कोच की पहचान हो जाने के कारण सैनिकों और जवानों की सुरक्षा के लिए भी खतरा बढ़ जाता था, क्योंकि कोई भी हमलावर या आतंकवादी इसी कोच को अपना टारगेट बना सकता था.
आज के समय में भारतीय रेलवे ने ट्रेनों में सीटों के लिए डिफेंस कोटा बढ़ा दिया है, जिससे सैनिकों को नियमित ट्रेनों में आसानी से सीट मिल सकती है. इससे भारतीय सैनिक सामान्य ट्रेनों में ही आसानी से रिजर्वेशन लेकर यात्रा कर सकते हैं.
भारतीय रेलवे ने मिलिट्री कोचों की संख्या कम जरूर की है, लेकिन स्पेशल मिलिट्री ट्रेनें आज भी चलाई जाती हैं. इन ट्रेनों का इस्तेमाल भारतीय सैनिकों की मूवमेंट के लिए किया जाता है, जिससे बड़ी संख्या में सैनिकों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाया जा सके.
मिलिट्री कोचों की भारतीय ट्रेनों में घटती संख्या का एक कारण यह भी है कि अब सरकार सैनिकों की मूवमेंट के लिए सैन्य विमानों का ज्यादा इस्तेमाल कर रही है. इससे सैनिकों की यात्रा ज्यादा तेज, सुरक्षित और आसान हो जाती है.
भारतीय रेलवे अपने पुराने नीले रंग वाले ICF कोचों को धीरे-धीरे हटाकर नए और आधुनिक LHB कोचों में बदल रही है. ये कोच पुराने कोचों की तुलना में ज्यादा सुरक्षित, उन्नत और आरामदायक हैं. अब रेलवे स्पेशल मिलिट्री कोच बनाने की बजाय इन्हीं आधुनिक कोचों का उपयोग करने की योजना पर काम कर रही है.