10 रुपये से लेकर 500 रुपये तक, एक नोट छापने के लिए कितना खर्च करती है सरकार?
भारत में नोट छापने का काम भारतीय रिजर्व बैंक यानि RBI करता है. देश में चार प्रिंटिंग प्रेस हैं, पहली नासिक में, दूसरी देवास, मैसूर और सालबोनी में. इन्हीं जगहों पर अलग-अलग मूल्य के नोट तैयार किए जाते हैं.
नोट छापने के लिए खास तरह का कागज और इंक विदेश से भी मंगाई जाती है, जिससे इसकी लागत और बढ़ जाती है. RBI की एक रिपोर्ट की मानें तो छोटे मूल्य वाले नोट यानी 10, 20 और 50 रुपये के नोट छापने की लागत लगभग 1 से 2 रुपये के आसपास पड़ती है.
100 रुपये के नोट को छापने का खर्च थोड़ा ज्यादा है, यह करीब 2 रुपये से 3 रुपये के आसपास होता है. वहीं 500 रुपये के नोट की बात करें तो इसको बनाने में सरकार को लगभग 2.5 रुपये से 3 रुपये का खर्च आता है.
यानि कि सरकार को जितना मूल्य नोट पर लिखा है, उसके मुकाबले उसे छापने पर बहुत ही कम पैसा खर्चा करना पड़ता है. अब यह भी जान लीजिए कि नोट बनाने के लिए साधारण कागज इस्तेमाल नहीं होता, बल्कि इसमें खास तरह का कॉटन और सिक्योरिटी फीचर वाला कागज लगाया जाता है.
इस कागज में वॉटरमार्क, सिक्योरिटी थ्रेड, माइक्रो लेटरिंग, कलर-शिफ्टिंग इंक जैसे फीचर्स मौजूद होते हैं, जिससे नकली नोट आसानी से पकड़े जा सकें. यही वजह है कि नोट छापने की लागत बढ़ जाती है.
हर साल RBI लाखों-करोड़ों नोट छापता है. रिपोर्ट्स की मानें तो साल 2022-23 में RBI ने सिर्फ नोट छापने पर ही करीब 4900 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे. यह खर्च हर साल नोटों की डिमांड और पुराने नोट वापस लेने पर भी निर्भर करता है.
अब अगर सिक्कों की बात करें तो इन्हें बनाने का खर्च ज्यादा लगता है. उदाहरण के तौर पर 1 रुपये का सिक्का बनाने में सरकार को करीब 1.6 रुपये खर्च करना पड़ता है.