10 साल में पहली बार चीनी खरीदेगा भारत, जानें कहां से करेगा इंपोर्ट?

भारत में चीनी की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं. त्योहार के सीजन से ठीक पहले कीमतों में आई इस तेज उछाल ने केंद्र सरकार की चिंता बढ़ा दी है. दरअसल मार्च महीने से ही चीनी के दाम लगातार बढ़ रहे थे, लेकिन बीते 15 दिनों के भीतर इसकी खुदरा कीमतों में अचानक प्रति किलो 17 रुपये तक का बड़ा इजाफा दर्ज किया गया. चीनी की इस महंगाई का असर आम आदमी की रसोई से लेकर चाय, दूध, मिठाइयों, जूस और चॉकलेट उद्योग तक व्यापक रूप से देखने को मिल रहा है.
बाजार में चीनी के दाम ज्यादा न बढ़ें और आपूर्ति बढ़ाने के लिए सरकार अब चीनी के आयात पर लगने वाली 100 फीसदी इंपोर्ट ड्यूटी को कम या पूरी तरह खत्म करने के प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार कर रही है.
भारत करीब 10 साल में पहली बार वैश्विक बाजार से चीनी का आयात करने जा रहा है. सरकार टैरिफ रेट कोटा के तहत मुख्य रूप से ब्राजील जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय चीनी उत्पादक देशों से रॉ शुगर मंगाएगी.
हालांकि किन देशों से चीनी का आयात किया जाएगा, इसकी आधिकारिक घोषणा आने वाली अधिसूचना में स्पष्ट होगी. उम्मीद जताई जा रही है कि ब्राजील या जिन देशों में चीनी का उत्पादन ज्यादा होता है, वहां से आयात किया जाए.
रिपोर्ट्स के मुताबिक साल 2025-26 का चीनी सीजन उम्मीद से ज्यादा चुनौतीपूर्ण रहा है. इस बार देश में उत्पादन कम होने के साथ-साथ घरेलू मांग में काफी बढ़ोतरी देखी गई. इसके अलावा गन्ने का बड़ा हिस्सा एथेनॉल बनाने में डायवर्ट होने से सरकारी इन्वेंट्री में कमी आई है.
मांग और आपूर्ति के बीच इस अंतर को और बढ़ाने में पिछला निर्यात का फैसला भी जिम्मेदार रहा है, जब सरकार ने नवंबर 2025 में 1.5 से 2 मिलियन टन चीनी निर्यात की अनुमति दी थी, जिसमें से 8 लाख टन चीनी पहले ही देश से बाहर जा चुकी थी.
बाजार में जमाखोरी रोकने और कीमतों पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने आयात के साथ-साथ सख्त प्रशासनिक कदम भी उठाए हैं.
नए सरकारी आदेश के तहत थोक उपभोक्ताओं और डीलरों पर चीनी की स्टॉक लिमिट को और कड़ा कर दिया गया है. जो कारोबारी महीने में 10 मीट्रिक टन से ज्यादा चीनी का इस्तेमाल करते हैं, वे अब केवल अपनी 15 दिनों की खपत के बराबर ही स्टॉक रख सकेंगे.
इससे पहले यह सीमा 30 दिनों के लिए थी. यह नियम 1 सितंबर से लागू होकर 30 नवंबर 2026 तक प्रभावी रहेगा.