आजादी से पहले या बाद में..कब शुरू हुआ था ₹1 का सिक्का, क्या है इतिहास?

₹1 Coin History: भारत आज अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है. इस देश की मुद्रा में ₹1 का सिक्का काफी आम हिस्सा लगा सकता है. लेकिन इसका इतिहास ब्रिटिश दौर का है. यह भारत के गणतंत्र बनने से लगभग दो सदी पहले शुरू हुआ था. 1757 में ईस्ट इंडिया कंपनी के पहले रुपये के सिक्के से लेकर ₹ के निशान वाले आधुनिक स्टेनलेस स्टील के सिक्के तक इसके डिजाइन, धातु और मूल्य प्रणाली में कई बार बदलाव हुए हैं. आइए जानते हैं इस ₹1 के सिक्के के इतिहास के बारे में.
ईस्ट इंडिया कंपनी ने प्लासी की लड़ाई के कुछ समय बाद 19 अगस्त 1757 को कलकत्ता मिंट में पहला ₹1 का सिक्का ढाला था.
1835 से पहले मुंबई, मद्रास और बंगाल प्रेसीडेंसी अलग-अलग सिक्के जारी करते थे. कॉइनेज एक्ट के तहत पूरे ब्रिटिश भारत में एक जैसा चांदी का रुपया शुरू किया गया.
1858 में जब ब्रिटिश क्राउन ने भारत का सीधा नियंत्रण अपने हाथ में लिया तब ₹1 के सिक्कों पर रानी विक्टोरिया, जॉर्ज पंचम और जॉर्ज षष्ठम जैसे राजा रानियों की तस्वीर होती थी.
दशमलव प्रणाली से पहले के दौर में ₹1 को 16 आने, 64 पैसे या फिर 192 पाई में बांटा जाता था. यह प्रणाली दशमलव प्रणाली लागू होने तक चलती रही.
आजादी के बाद भी कुछ समय तक ब्रिटिश सिक्के चलते रहे. गणतंत्र भारत का पहला सिक्का 1950 में जारी किया गया. इसमें राजा रानी की तस्वीर की जगह अशोक स्तंभ को शामिल किया गया.
1 अप्रैल 1957 को भारत ने दशमलव प्रणाली अपनाई और ₹1 को 100 पैसे में बांट दिया गया. नई प्रणाली को अलग दिखाने के लिए शुरू में नया पैसा शब्द का इस्तेमाल किया गया.
₹1 के सिक्के निकल से कॉपर निकल और बाद में फेरिटिक स्टेनलेस स्टील में बदल गए. 1988 से हल्के स्टील के सिक्के लाए गए, ताकि सिक्कों को पिघलाकर धातु निकालने की कोशिशों को कम किया जा सके.
डी उदय कुमार द्वारा डिजाइन किए गए आधुनिक रुपये के निशान को बनाए जाने के बाद 2011 से सिक्कों पर ₹ का निशान लगाया जाने लगा. इससे इस ऐतिहासिक मुद्रा को एक अलग और आधुनिक पहचान मिली.