अगर पृथ्वी पर एक भी पेड़ ना बचे तो इंसान कितने दिन जिंदा रहेगा, जानें यहां?

Tree Extinction: अगर धरती से सभी पेड़ अचानक गायब हो जाएं तो इंसानों के लिए सबसे बड़ा खतरा ऑक्सीजन की कमी नहीं होगी. हमारे वायुमंडल में इंसानी जिंदगी के लिए लंबे समय तक काफी ऑक्सीजन मौजूद है और धरती की आधी से ज्यादा ऑक्सीजन समुद्र में मौजूद फाइटोप्लांकटन से मिलती है. तो आखिर पेड़ गायब होने के बाद इंसान को खतरा किस चीज का होगा? आइए जानते हैं इस सवाल का जवाब और साथ ही यह भी कि पेड़ नहीं बचने के बाद इंसान कितने दिन तक जिंदा रह पाएगा.
पेड़ों के गायब होने से उन पर निर्भर इकोसिस्टम तुरंत प्रभावित होंगे. फल, बीज और पौधों से मिलने वाले खाने के स्रोत खत्म हो जाएंगे. साथ ही पेड़ पौधों पर निर्भर शाकाहारी जानवर भी मुश्किल में पड़ जाएंगे. इसका असर धीरे-धीरे शिकारी जानवरों और इंसानों पर भी पड़ेगा. इस वजह से फूड चेन पूरी तरह से टूट जाएगी.
पेड़ मिट्टी को थामे रखने और बारिश के पानी को जमीन के अंदर पहुंचाने और बनाए रखने में बड़ी भूमिका निभाते हैं. उनके बिना भारी बारिश से भयंकर बाढ़ आ सकती है और मिट्टी का कटाव हो सकता है. इसी के साथ मीठे पानी के स्रोत धीरे-धीरे सूख सकते हैं.
सिर्फ इस वजह से की पेड़ गायब हो गए हैं इंसान कुछ ही दिनों में दम घुटने से नहीं मरेंगे. वायुमंडल में पहले से ही ऑक्सीजन का काफी बड़ा भंडार मौजूद है और समुद्र में मौजूद फाइटोप्लांकटन धरती की आधी से ज्यादा ऑक्सीजन बनाते हैं.
पेड़ कार्बन डाइऑक्साइड को सोखने वाले मुख्य प्राकृतिक स्रोत हैं. अगर वह अचानक गायब हो जाएं तो वायुमंडल से कार्बन डाइऑक्साइड हटाने का धरती का एक बड़ा तरीका खत्म हो जाएगा. इस वजह से वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड बढ़ जाएगी. इसके बाद ग्रीन हाउस प्रभाव तेज होगा और ग्लोबल वार्मिंग बढ़ेगी.
जैसे-जैसे कार्बन डाइऑक्साइड जमा होगी और जंगलों का जलवायु को कंट्रोल करने वाला काम खत्म होगा. तापमान खतरनाक स्तर तक बढ़ सकता है. ऐसी स्थिति में कुछ इलाकों में तापमान 50 डिग्री सेल्सियस से 60 डिग्री सेल्सियस से भी ज्यादा हो सकता है.
काफी ज्यादा गर्मी, बढ़ती कार्बन डाइऑक्साइड और खत्म होते इकोसिस्टम का मिला जुला असर इंसान पर काफी बड़ा दबाव डाल सकता है. सांस से जुड़ी समस्या और मौसम से जुड़ी दूसरी बीमारी बढ़ जाएंगी. इसी के साथ खाने पीने की चीजों की कमी से आबादी और भी ज्यादा मुश्किल में घिर जाएगी.
पेड़ ट्रांसपिरेशन के जरिए मिट्टी, पेड़ पौधों और वातावरण के बीच पानी के आवागमन में मदद करते हैं. इस वजह से उनके खत्म होने से पानी का सामान्य चक्र और बारिश के पैटर्न बिगड़ जाएंगे. वक्त के साथ इससे धरती का बड़ा हिस्सा सूखा और बंजर हो सकता है.
बिना पेड़ों वाली दुनिया में जिन इंसानों के पास एडवांस टेक्नोलॉजी होगी उनके ज्यादा समय तक जिंदा रहने की संभावना बेहतर हो सकती है. खाने और पानी का उत्पादन करने वाले आर्टिफिशियल सिस्टम शायद सीमित आबादी को जिंदा रख सकें.