Oil Crisis: अगर भारत में खत्म हो जाए तेल का भंडार, तो ये देश बगैर सोचे समझे करेंगे हमारी मदद, यहां देखिए लिस्ट

Oil Crisis: होर्मुज स्ट्रेट के आसपास तनाव की वजह से ईंधन की कीमतों को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच कई लोग यह सोच रहे हैं कि अगर भारत को कभी तेल की भारी कमी का सामना करना पड़ा तो क्या होगा. आइए जानते हैं कि ऐसे मुश्किल समय में कौन से देश भारत का साथ देंगे.
रूस वर्तमान में भारत के सबसे बड़े कच्चे तेल आपूर्तिकर्ता में से एक है. यह देश की ऊर्जा जरूरत को पूरा करने में बड़ी भूमिका निभाता है. भू राजनीतिक अनिश्चितता और वैश्विक प्रतिबंधों के दौर में भी भारत को रूस का तेल निर्यात जारी रहा है. प्रतिस्पर्धी कीमतों पर बड़ी मात्रा में कच्चा तेल उपलब्ध कराने की क्षमता रूस को किसी भी संभावित ईंधन संकट के दौरान भारत का सबसे भरोसेमंद साझेदार बनाती है.
संयुक्त अरब अमीरात न सिर्फ तेल का एक बड़ा निर्यातक है बल्कि एक रणनीतिक ऊर्जा साझेदार भी है. भारत के रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार के साथ सहयोग के जरिए से संयुक्त अरब अमीरात स्थित ADNOC भारत में ही कच्चा तेल जमा करता है.
सऊदी अरब दशकों से भारत को तेल की आपूर्ति कर रहा है और देश के सबसे भरोसेमंद ऊर्जा साझेदारों में से एक बना हुआ है. इस देश के पास उत्पादन की भारी क्षमता है और इसने अक्सर संकट के समय वैश्विक तेल बाजारों को स्थिर करने में काफी मदद की है.
वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा प्रमाणित तेल भंडार है. इसे भारत की भविष्य की ऊर्जा रणनीति के लिए एक जरूरी साझेदार माना जाता है. जैसे-जैसे दोनों देशों के बीच संबंध मजबूत हो रहे हैं वेनेजुएला का कच्चा तेल भारत को आपूर्ति का एक वैकल्पिक स्रोत देता है.
भारत अपनी तेज जरूरत के लिए किसी एक देश पर निर्भर नहीं है. इसके बजाय यह दुनिया के कई इलाकों से कच्चा तेल मंगाता है. इनमें मिडल ईस्ट, रूस, अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका शामिल हैं. यह अलग-अलग जगह से तेल मंगाने की रणनीति देश को अचानक आने वाली रूकावटों से बचाती है.
मित्र देशों से मिलने वाली मदद के अलावा भारत आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार भी रखता है. अगर तेल का इंपोर्ट रुक जाए तो ये भंडार काफी समय तक कच्चे तेल की सप्लाई कर सकते हैं.