नींद में अचानक क्यों होता है गिरने का एहसास? जानें इसके पीछे क्या है विज्ञान

रात में बिस्तर पर लेटते ही जब शरीर धीरे-धीरे आराम की स्थिति में जाने लगता है, तब कई बार अचानक ऐसा लगता है कि हम किसी ऊंची जगह से नीचे गिर रहे हैं. इस तीव्र आभास के साथ ही पूरा शरीर एक झटके के साथ चौंक उठता है और आंख खुल जाती है. विज्ञान में इस स्थिति को हाइपनिक जर्क या स्लीप स्टार्ट कहा जाता है. दुनिया भर में अधिकांश लोग जीवन में कभी न कभी इस अनुभव से गुजरते हैं. यह कोई बीमारी नहीं, बल्कि जागने और सोने के बीच के समय में हमारे दिमाग और तंत्रिका तंत्र में होने वाली एक स्वाभाविक शारीरिक प्रतिक्रिया है. आइए इसके पीछे का विज्ञान समझें.
सोने की शुरुआती प्रक्रिया के दौरान हमारा नर्वस सिस्टम धीमा होने लगता है और दिमाग से शरीर को भेजे जाने वाले संदेशों की गति बदलती है. वैज्ञानिक शोध के अनुसार, इस दौरान मस्तिष्क के निचले हिस्से यानी रेटिक्युलर ब्रेनस्टेम की तंत्रिकाओं के बीच कभी-कभी सिग्नल का मिसफायर हो जाता है.
जब दिमाग और मांसपेशियों के बीच तालमेल बिठाने वाले ये न्यूरोनल सिग्नल गलत समय पर सक्रिय होते हैं, तो तंत्रिका तंत्र तुरंत प्रतिक्रिया देता है. इसी की वजह से हाथों, पैरों या पूरे शरीर में अचानक एक तेज अनैच्छिक झटका महसूस होता है.
जब हम गहरी नींद की ओर बढ़ते हैं, तो हमारी मांसपेशियां पूरी तरह ढीली और तनावमुक्त हो जाती हैं. इस प्रक्रिया में कभी-कभी दिमाग इस अचानक आए खिंचाव या शिथिलता को शरीर के असंतुलन या नीचे गिरने के रूप में समझ बैठता है.
दिमाग को लगता है कि शरीर किसी खतरे में है या नीचे गिर रहा है, इसलिए वह खुद को बचाने के लिए तुरंत मांसपेशियों को अचानक कड़ा करने का मैसेज भेजता है. इसी मानसिक गलतफहमी के कारण हमें अचानक झटके से गिरने या किसी के धक्का देने जैसा अनुभव होता है.
हाइपनिक जर्क को समझने के लिए वैज्ञानिक एक इवोल्यूशनरी थ्योरी यानी विकासवादी दृष्टिकोण भी सामने रखते हैं. इस अवधारणा के अनुसार, जब इंसान जंगलों में पेड़ों पर सोया करते थे, तब सोते समय मांसपेशियों का पूरी तरह ढीला पड़ना पेड़ से नीचे गिरने का संकेत हो सकता था.
ऐसे में खुद को गिरने से बचाने के लिए दिमाग झटके से शरीर को जगा देता था. हालांकि, वैज्ञानिक इसे केवल एक संभावित हाइपोथिसिस मानते हैं और इसके कोई ठोस या पूरी तरह स्थापित प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं, फिर भी यह थ्योरी काफी चर्चित है.
तमाम अध्ययनों और वैज्ञानिक समीक्षाओं के बाद भी हाइपनिक जर्क का कोई एक अकेला कारण तय नहीं किया जा सका है. हालांकि, यह पूरी तरह साफ है कि यह दिमाग के उस हिस्से से जुड़ा है जो हमें अचानक किसी डर या चौंकने पर प्रतिक्रिया देने के लिए तैयार करता है.
यदि नींद में जाते समय आपके साथ भी ऐसा झटका लगता है या गिरने का अहसास होता है, तो घबराने की कोई बात नहीं है. यह सिर्फ आपके शरीर का जागृत अवस्था से निद्रा अवस्था में प्रवेश करने का एक साधारण और सुरक्षित जैविक जरिया है.