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रूस और चीन को कितना तेल बेचता था वेनेजुएला, अमेरिका के एक्शन के बाद कितनी हो जाएगी कमी?

निधि पाल   |  05 Jan 2026 10:37 PM (IST)
रूस और चीन को कितना तेल बेचता था वेनेजुएला, अमेरिका के एक्शन के बाद कितनी हो जाएगी कमी?

जब वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को अमेरिका ने गिरफ्तार कर लिया, तो दुनिया के कुछ सबसे बड़े तेल ग्राहक रूस और चीन पर असर पड़ा है. वेनेजुएला के विशाल तेल भंडार और उसका निर्यात इन देशों के लिए लंबे समय से आसान ऊर्जा का स्रोत रहा है. अब अमेरिका के सैन्य और आर्थिक फैसलों से ये तेल सप्लाई कैसे बदल सकती है? और इसका असर रूस, चीन और वैश्विक बाजार पर कितना होगा. आइए इसकी पूरी तस्वीर देखते हैं.

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पिछले कुछ सालों में अमेरिका की सख्त प्रतिबंध नीति के बीच वेनेजुएला ने अपनी तेल सप्लाई पूरी तरह से बदल दी थी. पारंपरिक रूप से अमेरिका कई दशकों तक वेनेजुएला का सबसे बड़ा ग्राहक रहा है, लेकिन 2019 के बाद अमेरिका-वेनेजुएला तेल व्यापार लगभग रुक सा गया था.

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इस वजह से चीन वेनेजुएला का प्रमुख तेल ग्राहक बन गया था. एक रिपोर्ट के अनुसार नवंबर 2025 में वेनेजुएला रोजाना करीब 613,000 बैरल कच्चा तेल चीन को भेज रहा था, जो वहां का सबसे बड़ा निर्यात पथ था.

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यह मात्रा वेनेजुएला के कुल निर्यात का लगभग 76-80 प्रतिशत थी. रूस को सीधे वेनेजुएला से निर्यात के आंकड़े उतने स्पष्ट नहीं हैं, लेकिन यह माना जाता है कि रूस भी वेनेजुएला के तेल बाजार का एक अहम हिस्सा रहा करता था, खासकर उन स्थितियों में जब रूस की खुद की तेल निर्यात नीति और वैश्विक प्रतिबंधों का मबूजत असर रहा.

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हाल के अमेरिकी सैन्य और कूटनीतिक एक्शन ने वेनेजुएला के तेल बाजार को सीधे प्रभावित किया है. अमेरिका ने जहाजों और तेल टैंकरों पर ब्लॉकेड जैसे कदम उठाए, जिससे वेनेजुएला के तेल निर्यात करने वाले जहाजों की आवाजाही कठिन हो गई है.

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इसके चलते चीन को जाने वाला तेल निर्यात दिसंबर में गिरकर करीब 2 मिलियन बैरल तक आ गया, जबकि पहले यह 8.9 मिलियन बैरल तक था. अर्थात् निर्यात में भारी गिरावट दर्ज हुई है.

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इससे स्पष्ट है कि अमेरिका की कार्रवाई से सिर्फ अमेरिका की दिशा में ही नहीं, चीन की तरफ जाने वाले निर्यात में भी कमी आई है.

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बाजार डेटा से पता चलता है कि वेनेजुएला की कुल तेल निर्यात क्षमता पहले की तुलना में काफी कम हो गई है. 2015 में यह लगभग 2 मिलियन बैरल प्रतिदिन के आस-पास थी, लेकिन अब सख्त प्रतिबंधों और उत्पादन में गिरावट के कारण यह गिरकर लगभग 750,000 बैरल प्रतिदिन रह गई है.

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