घातक कमांडो को एक साल में कितनी मिलती है शराब, क्या इनका भी होता है कोटा?

Ghatak Commandos Liquor Quota: जब भारतीय सेना के घातक कमांडो जैसी खास यूनिट्स की बात आती है तो ज्यादातर लोग कड़ी ट्रेनिंग, खुफिया ऑपरेशंस और युद्ध के मैदान में सटीक कार्रवाई के बारे में सोचते हैं. लेकिन अक्सर ही लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि क्या दूसरे जवानों की तरह ही घातक कमांडो को भी सेना की कैंटीन से शराब का कोटा मिला होता है? आइए जानते हैं क्या है इस सवाल का जवाब.
अपनी खास स्थिति के बावजूद घातक कमांडो को सिर्फ इसलिए अलग या फिर ज्यादा शराब का कोटा नहीं मिलता कि वे कमांडो हैं. उनका अधिकार पूरी तरह से उनकी रैंक से तय होता है.
शराब का कोटा हर महीने जारी किया जाता है. लेकिन असल में यह 1 साल की सीमा तय करता है. औसतन जवानों को हर महीने लगभग चार से पांच बोतले मिलती हैं. यानी कि साल की 48 से 60 बोतलें. इसी तरह JCO कुछ साल की 72 से 84 बोतलें और कमीशंड ऑफीसर्स को साल की 120 से 144 बोतलों का कोटा मिलता है. ये आंकड़े ऑपरेशनल स्थिति और पोस्टिंग के स्थान के आधार पर थोड़े बहुत अलग हो सकते हैं.
फील्ड एरिया या फिर ज्यादा तनाव वाले ऑपरेशनल जोन में तैनात जवानों के कोटे में शांत इलाकों में तैनात जवानों की तुलना में कुछ बदलाव देखने को मिल सकते हैं. यह बदलाव सेना के इन प्रयासों को दिखाता है कि वह वेलफेयर से जुड़े मुद्दों को जमीनी हकीकतों के हिसाब से ढाल सके.
शराब के लिए स्मार्ट कार्ड की शुरुआत ने इस सिस्टम को आधुनिक बना दिया है. हर खरीदारी को डिजिटल रूप से रिकॉर्ड किया जाता है. इससे यह पक्का होता है कि कोई भी व्यक्ति अपने कोटे से ज्यादा खरीदारी ना कर सके.
कैंटीन से खरीदी गई शराब पूरी तरह से निजी इस्तेमाल के लिए होती है. इसे तय सीमा से बाहर बेचना या फिर बांटना सेना के नियमों का उल्लंघन है. इसके लिए अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है.
सीएसडी सिस्टम का एक बड़ा फायदा है सब्सिडी वाली कीमतें. यहां शराब अक्सर बाजार की कीमतों से 40% से 55% तक सस्ती मिलती है. इसका फायदा सिर्फ नौकरी के दौरान ही नहीं मिलता बल्कि रिटायर हो चुके जवान को भी मिलता है.