भारत सरकार को कितने रुपये का पड़ता है एक लीटर पेट्रोल, जानिए हर साल इससे कितनी होती है कमाई?

देश में पेट्रोल की कीमत अक्सर चर्चा का विषय रहती है. कई लोगों के मन में सवाल होता है कि आखिर सरकार एक लीटर पेट्रोल कितने रुपये में खरीदती है और पेट्रोल पंप तक पहुंचने तक कीमत लगभग दौगुनी कैसे हो जाती है. दरअसल भारत अपनी जरूरत का करीब 85 से 90 प्रतिशत कच्चा तेल विदेश से आयात करता है.
भारत रूस, इराक, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, अमेरिका और ईरान समेत 40 से ज्यादा देशों से कच्चा तेल खरीदता है. पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पूरी भी हाल ही में बता चुके हैं कि भारत कई देशों से कच्चे तेल आयात कर रहा है और आपूर्ति को लेकर कोई समस्या नहीं है.
विदेश से खरीदा गया कच्चे तेल सीधा पेट्रोल के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाता है. इसे पहले रिफाइनरी में भेजा जाता है, जहां रिफाइनिंग प्रक्रिया के बाद पेट्रोल, डीजल, एलपीजी, एटीएफ और दूसरे पेट्रोलियम उत्पाद तैयार किया जाता है. रिफाइनिंग, परिवहन और डीलर कमीशन जैसी लागत जोड़ने के बाद इसकी कीमत बढ़ जाती है.
दिल्ली के आंकड़ों के अनुसार 1 लीटर पेट्रोल का बेस प्राइज करीब 52.84 रुपये प्रति लीटर है. यह कीमत है, जिसमें कच्चे तेल की खरीद, रिफाइनिंग और अन्य प्रारंभिक खर्च शामिल है. इसके बाद डीलर कमीशन और दूसरे शुल्क जोड़े जाते हैं.
इसके ऊपर केंद्र सरकार एक्साइज ड्यूटी वसुलती है, जबकि राज्य सरकारे वेट या सेस टैक्स लगाती है. दिल्ली में 1 लीटर पेट्रोल पर केंद्र सरकारें 21.90 रुपये एक्साइज ड्यूटी हो सकती है, जबकि राज्य सरकार को लगभग 15.40 प्रति लीटर वेट मिलता है. डीलर कमीशन करीब 4.39 रुपये प्रति लीटर होता है. इन सभी शुल्कों और करो को जोड़ने के बाद पेट्रोल की खुदरा कीमत तय होती है.
पेट्रोल की बिक्री से केंद्र और राज्य सरकार दोनों को आय होती है. केंद्र सरकार को मुख्य रूप से एक्साइज ड्यूटी और सेस से कमाई होती है जो कि राज्य सरकारों को वेट के जरिए राजस्व मिलता है. यानी पेट्रोल की कीमत में उपभोक्ता जो पैसा देता है, उसका बड़ा हिस्सा टैक्स के रूप में सरकारों के पास जाता है.
पेट्रोलियम उत्पाद केंद्र और राज्य सरकारों के लिए सबसे बड़े राजस्व सोर्स में शामिल है. वित्त वर्ष 2023-2024 में पेट्रोलियम सेक्टर से कुल कर संग्रह से 7.5 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा रहा. इसमें केंद्र सरकार को एक्साइज ड्यूटी और दूसरे करों से करीब 2.7 से 3 लाख करोड़ रुपये की आय हुई. जबकि राज्यों ने वैट के जरिए 3 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई की.