Alcohol Storage Limit: बिना लाइसेंस के कितनी शराब स्टोर कर सकते हैं, नियम तोड़ने पर क्या मिलेगी सजा?

Alcohol Storage Limit: भारत में कोई भी व्यक्ति कानूनी तौर पर बिना लाइसेंस के घर पर कितनी शराब जमा कर सकता है यह राज्य के नियमों पर निर्भर करता है. दरअसल शराब नियम व्यक्तिगत राज्य सरकारों द्वारा अपने उत्पाद शुल्क विभागों के जरिए से तय किए जाते हैं. आइए जानते हैं इस बारे में पूरी जानकारी.
उत्तर प्रदेश में एक व्यक्ति बिना लाइसेंस के घर पर 1.5 लीटर तक भारतीय निर्मित विदेशी शराब, दो लीटर वाइन और 6 लीटर बीयर स्टोर कर सकता है. इन सीमाओं से ज्यादा मात्रा रखने के इच्छुक किसी भी व्यक्ति को होम बार लाइसेंस लेना होगा.
दिल्ली में एक व्यक्ति को घर पर बीयर और वाइन सहित कुल 18 लीटर शराब रखने की अनुमति है. हालांकि दूसरे राज्यों से लाई गई शराब पर एक अलग प्रतिबंध लागू होता है. इसकी मात्रा सिर्फ 1 लीटर तक होनी चाहिए.
हरियाणा बिना लाइसेंस के सीमित घरेलू भंडार की अनुमति देता है. इसमें अलग-अलग प्रकार की शराब के लिए अलग-अलग मात्रा होती है. अनुमत सीमा देसी शराब की 6 बोतल, बियर की 18 बोतल, रम की छह बोतल और विदेशी शराब या वाइन की 12 बोतल हैं.
पंजाब में कोई भी व्यक्ति कानूनी तौर पर बिना लाइसेंस के भारत निर्मित विदेशी शराब की दो बोतल, आयातित शराब की दो बोतल, 12 बोतल या एक पेटी बियर और एक बोतल ब्रांडी रख सकता है.
पश्चिम बंगाल में 21 साल से ज्यादा उम्र के व्यक्ति भारत निर्मित विदेशी शराब की 6 बोतल रख सकते हैं. हर बोतल में 750 मिलीलीटर होती है. राज्य भी तय सीमा के तहत बियर की अधिकतम 18 बोतलों की अनुमति देता है.
महाराष्ट्र में शराब रखने का इस्तेमाल करने के लिए वैध शराब परमिट की जरूरत होती है. परमिट के साथ एक व्यक्ति घर पर ज्यादा से ज्यादा 12 बोतलें रख सकता है. बिहार और गुजरात शराबबंदी नीतियों का पालन करते हैं.
अगर पुलिस या उत्पाद शुल्क विभाग को छापेमारी के दौरान मंजूर मात्रा से ज्यादा शराब मिल जाती है तो कब्जे को अवैध भंडारण माना जा सकता है. उत्तर प्रदेश में बिना लाइसेंस होम बार या फिर तय सीमा में से ज्यादा रखने पर भारी जुर्माना लग सकता है. जरूरी लाइसेंस के बिना शादी या फिर पार्टी में शराब परोसने पर ₹1,00,000 तक का जुर्माना लग सकता है.
राज्य उत्पाद शुल्क अधिनियम प्रावधानों के उल्लंघन पर 3 साल तक की कैद हो सकती है. पहली बार उल्लंघन करने पर जुर्माना या फिर जेल की सजा हो सकती है और बार-बार उल्लंघन करने पर ज्यादा गंभीर कानूनी कार्रवाई हो सकती है.