कैसे बनाई जाती है नकली चांदी, इसमें क्या-क्या मिलाते हैं जालसाज?

सर्राफा बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच आभूषणों की खरीदारी हमेशा बनी रहती है. सोना और चांदी की बढ़ती कीमतों के कारण कई बार लोग सस्ते के चक्कर में जालसाजों का शिकार बन जाते हैं. बाजार में असली जैसी दिखने वाली नकली चांदी धड़ल्ले से बेची जा रही है. इसी बीच पहले सोने-चांदी के रेट जान लेते हैं. वर्तमान में 24 कैरेट शुद्ध सोने का भाव करीब 1,59,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास चल रहा है, जबकि 22 कैरेट आभूषण वाले सोने की कीमत 1,46,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर बनी हुई है. वहीं चांदी के दामों में भी मामूली गिरावट आई है और अब देश में एक किलोग्राम चांदी का रेट 2,84,900 रुपये पर पहुंच गया है. कल के मुकाबले इसमें लगभग 100 रुपये की कमी दर्ज की गई है. अब आइए असली-नकली चांदी में अंतर जानें.
बाजार में नकली चांदी बनाने का सबसे पसंदीदा और आसान जरिया 'जर्मन सिल्वर' को माना जाता है. यह नाम सुनने में भले ही चांदी जैसा लगता है, लेकिन सच यह है कि इसमें चांदी की मात्रा बिल्कुल 0% होती है.
जालसाज इसे बनाने के लिए तांबा (Copper), जस्ता (Zinc) और निकल (Nickel) जैसी सस्ती धातुओं को एक निश्चित अनुपात में मिलाते हैं. इन धातुओं का यह मिश्रण तैयार होने के बाद हूबहू असली चांदी जैसी सफेद चमक देता है.
जालसाजी का दूसरा सबसे बड़ा तरीका 'सिल्वर प्लेटिंग' कहलाता है. इसमें ठग सबसे पहले तांबे या पीतल जैसी बेहद सस्ती और भारी धातुओं का इस्तेमाल करके गहने, सिक्के या बर्तन तैयार कर लेते हैं. इसके बाद इलेक्ट्रोप्लेटिंग तकनीक की मदद से उन बर्तनों या गहनों के ऊपर असली चांदी की एक बेहद बारीक और पतली परत चढ़ा दी जाती है.
ऊपर से देखने पर यह पूरी तरह असली लगती है, लेकिन इस्तेमाल के बाद घिसने पर अंदर की पीली धातु बाहर आ जाती है. नकली और मिलावटी चांदी को बाजार में खपाने के लिए ठग 'ब्रिटानिया मेटल' का भी सहारा लेते हैं. यह मुख्य रूप से टिन, एंटीमनी और कॉपर को पिघलाकर बनाई जाने वाली एक बेहद हल्की और चमकदार मिश्र धातु होती है.
इसके अलावा, कम गुणवत्ता वाली या मिलावटी चांदी की चमक को कई गुना बढ़ाने के लिए इसके ऊपर रोडियाम की पॉलिश कर दी जाती है. इस पॉलिश के बाद आम ग्राहक असली और नकली का अंतर कभी नहीं समझ पाता.
चांदी में वजन और सही आकार देने के लिए धोखेबाज लोग तांबा, निकल, जस्ता, सीसा (Lead), टिन और एल्युमिनियम का जमकर इस्तेमाल करते हैं. सीसा और टिन जैसी धातुएं बेहद सस्ती होती हैं और इन्हें चांदी में पिघलाकर मिलाना बहुत आसान होता है.
कई बार चांदी की शुद्धता को आधा से भी कम करके उसमें भारी मात्रा में निकल और जिंक मिला दिया जाता है, जिससे चांदी का रंग तो सफेद ही रहता है लेकिन उसकी असल कीमत खत्म हो जाती है.
नकली चांदी के इस जाल से बचने के लिए भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) द्वारा तय किए गए नियमों की जानकारी होना जरूरी है. हमेशा हॉलमार्क और '925' का निशान देखकर ही चांदी खरीदें. इसके अलावा आप खुद भी घर पर इसकी जांच कर सकते हैं. असली चांदी कभी भी चुंबक से नहीं चिपकती है. यदि चांदी का सिक्का या गहना चुंबक की तरफ खिंचा चला जाए, तो समझ लें कि उसमें बड़ी मात्रा में निकल या लोहे की मिलावट की गई है.