कितनी भारी है अपनी धरती, कैसे नापा जाता है इसका वजन?
वैज्ञानिकों के अनुसार पृथ्वी का द्रव्यमान लगभग 5.9722×10^24 किलोग्राम है. आसान भाषा में कहें तो यह करीब 6 के बाद 24 शून्य लगाने जितना बड़ा आंकड़ा है. पाउंड में देखें तो यह लगभग 13.1 सेप्टिलियन पाउंड बैठता है.
इतना बड़ा आंकड़ा समझना आसान नहीं है. तुलना के लिए कहें तो यह मिस्र के पिरामिड जैसे विशाल ढांचों के खरबों-खरब वजन के बराबर है. यानी हमारी धरती जितनी विशाल दिखती है, उसका द्रव्यमान उससे भी कहीं ज्यादा विशाल है.
यहां एक जरूरी बात समझनी चाहिए कि आमतौर पर हम वजन और द्रव्यमान को एक जैसा मान लेते हैं, लेकिन विज्ञान में दोनों अलग हैं. द्रव्यमान किसी वस्तु में मौजूद पदार्थ की कुल मात्रा है. यह हर जगह एक जैसा रहता है, लेकिन वजन उस पर लगने वाले गुरुत्वाकर्षण बल पर निर्भर करता है.
अगर आप चांद पर जाएंगे तो आपका द्रव्यमान वही रहेगा, लेकिन वजन कम हो जाएगा क्योंकि वहां गुरुत्वाकर्षण कम है. इसी तरह पृथ्वी का द्रव्यमान स्थिर है, लेकिन उसका वजन किस गुरुत्वाकर्षण के संदर्भ में मापा जा रहा है, इस पर निर्भर करेगा.
धरती को किसी तराजू पर रखकर तौलना संभव नहीं है, इसलिए वैज्ञानिकों ने गुरुत्वाकर्षण के नियमों का सहारा लिया. सालों पहले महान वैज्ञानिक Isaac Newton ने गुरुत्वाकर्षण का नियम दिया. इस नियम के मुताबिक ब्रह्मांड की हर वस्तु दूसरी वस्तु को आकर्षित करती है. दो वस्तुओं के बीच लगने वाला बल उनके द्रव्यमान और दूरी पर निर्भर करता है.
बाद में वैज्ञानिकों ने पृथ्वी की सतह पर गुरुत्वाकर्षण त्वरण (लगभग 9.8 मीटर प्रति सेकंड वर्ग) को मापा. फिर गणितीय सूत्रों की मदद से पृथ्वी का द्रव्यमान निकाला गया. यानी धरती का द्रव्यमान सीधे नहीं, बल्कि उसके गुरुत्वाकर्षण प्रभाव को मापकर तय किया गया.
दिलचस्प बात यह है कि पृथ्वी का द्रव्यमान पूरी तरह स्थिर नहीं रहता. अंतरिक्ष से रोज थोड़ी-बहुत धूल और छोटे उल्कापिंड धरती पर गिरते हैं, जिससे उसका द्रव्यमान थोड़ा बढ़ता है. वहीं दूसरी ओर, हमारे वायुमंडल से हल्की गैसें अंतरिक्ष में निकलती रहती हैं, जिससे थोड़ा द्रव्यमान कम भी होता है. हालांकि ये बदलाव इतने छोटे होते हैं कि अरबों वर्षों में भी पृथ्वी के कुल द्रव्यमान पर बड़ा असर नहीं डालते हैं.
दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में गुरुत्वाकर्षण का बल थोड़ा-बहुत अलग होता है. ध्रुवों और भूमध्य रेखा पर गुरुत्वाकर्षण में हल्का फर्क देखा जाता है. इसी कारण अगर वजन की बात करें तो वह जगह के हिसाब से बदल सकता है, लेकिन द्रव्यमान एक स्थिर मान है, इसलिए वैज्ञानिक जब पृथ्वी का वजन बताते हैं, तो असल में वे उसका द्रव्यमान बताते हैं.
5.9722×10^24 किलोग्राम जैसी संख्या सिर्फ एक आंकड़ा नहीं है. यह बताती है कि हमारी धरती कितनी विशाल और शक्तिशाली है. इसी द्रव्यमान के कारण उसका गुरुत्वाकर्षण हमें जमीन से जोड़े रखता है, समुद्रों को थामे रखता है और चांद को उसकी कक्षा में घुमाता है. अगर पृथ्वी का द्रव्यमान कम या ज्यादा होता, तो जीवन की स्थितियां पूरी तरह बदल सकती थीं.