रोज सुबह उठकर कौन तय करता है सोने के दाम, क्या हर दिन भाव बदलना जरूरी है?

हाल ही में जब भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा अपना सोना बेचने की अफवाहें उड़ीं, तो देश भर के लोगों का ध्यान एक बार फिर सोने की तरफ गया. हालांकि आरबीआई का 880.52 टन का खजाना पूरी तरह सुरक्षित है, लेकिन इस चर्चा ने आम लोगों के मन में एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है. हम रोज सुबह अखबारों और टीवी पर सोने के नए दाम देखते हैं, जो कभी बढ़ जाते हैं तो कभी घट जाते हैं. आखिर रोज सुबह उठकर कौन तय करता है सोने की ये कीमतें? क्या हर दिन इसका भाव बदलना वाकई जरूरी है या यह सिर्फ एक खेल है? आइए जानते हैं इसके पीछे का असली गणित.
भारत में सोने की कीमतें किसी एक व्यक्ति, कंपनी या केंद्र सरकार के इशारे पर तय नहीं होती हैं. देश में रोजाना सोने का आधिकारिक भाव तय करने का जिम्मा 'इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन' (IBJA) के पास है.
इस एसोसिएशन के भीतर देश के सबसे बड़े और प्रमुख सर्राफा व्यापारी, सोने का आयात करने वाले बैंक और सरकारी एजेंसियां शामिल हैं. यह संस्था हर दिन देश के अलग-अलग हिस्सों के बड़े डीलरों से बात करती है और अंतरराष्ट्रीय बाजार के रुख को देखते हुए रोजाना सुबह और शाम को सोने के नए रेट जारी करती है.
सोने के दाम का रोज बदलना कोई मनमर्जी नहीं, बल्कि एक बेहद जरूरी और स्वाभाविक प्रक्रिया है. इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि सोना कोई स्थानीय चीज नहीं, बल्कि एक अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी है.
पूरी दुनिया में इसका व्यापार 24 घंटे लगातार चलता रहता है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 'लंदन बुलियन मार्केट एसोसिएशन' (LBMA) वैश्विक स्तर पर इसके बेंचमार्क रेट तय करता है. दुनिया के अलग-अलग देशों के टाइम जोन और वहां होने वाले व्यापार के उतार-चढ़ाव के कारण सोने की वैश्विक कीमतें हर पल बदलती रहती हैं.
भारत अपनी घरेलू जरूरत को पूरा करने के लिए लगभग 85 से 90% सोना विदेशों से खरीदता है, जिसे आयात करना कहा जाता है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की यह पूरी खरीद-फरोख्त अमेरिकी डॉलर में की जाती है.
इसी वजह से अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये की कीमत में हर दिन जो भी उतार-चढ़ाव आता है, उसका सीधा और तुरंत असर भारत में सोने की घरेलू कीमतों पर पड़ता है. अगर रुपया कमजोर होता है, तो भारत के लिए सोना आयात करना महंगा हो जाता है.
बाजार का एक सीधा नियम है कि जिस चीज की मांग बढ़ेगी, उसकी कीमत भी ऊपर जाएगी. सोने के मामले में भी मांग और आपूर्ति का यह सिद्धांत पूरी तरह काम करता है. भारत में शादी-ब्याह के सीजन या धनतेरस और दिवाली जैसे बड़े त्योहारों के दौरान अचानक सोने की मांग बहुत ज्यादा बढ़ जाती है.
जब बाजार में सोने की मांग अचानक बढ़ती है और उस अनुपात में पीछे से सप्लाई कम होती है, तो दैनिक आधार पर सोने के भाव में तेजी देखने को मिलती है. सोने की दैनिक कीमतों को प्रभावित करने में देश की आर्थिक नीतियां और सरकारी टैक्स भी बड़ी भूमिका निभाते हैं.
केंद्र सरकार द्वारा सोने पर लगाए जाने वाले आयात शुल्क और वस्तु एवं सेवा कर (GST) में जब भी कोई फेरबदल होता है, तो कीमतें तुरंत बदल जाती हैं. इन सभी वैश्विक और घरेलू कारणों को मिलाकर ही ग्राहकों को पूरी पारदर्शिता के साथ सही और वास्तविक कीमत देने के लिए हर दिन सुबह-शाम सोने के दाम बदलना बेहद जरूरी हो जाता है.