Mobile Internet: कैसे काम करता है इंटरनेट, जानें बिना तारों के मोबाइल तक कैसे पहुंचती है इंटरनेट स्पीड
लगभग 99% इंटरनेट हवा के जरिए नहीं बल्कि फिजिकल केबल्स के जरिए ट्रैवल करता है. ये हाई स्पीड ऑप्टिकल फाइबर केबल्स होती हैं जो जमीन के नीचे और समुद्र के नीचे बिछाई जाती हैं. ये डेटा को लाइट सिग्नल के रूप में लगभग लाइट की स्पीड से ले जाती हैं.
जब आप किसी दूसरे देश में होस्ट की गई वेबसाइट खोलते हैं तो आपका डेटा समुद्र तल पर बिछाई गई सबमरीन फाइबर ऑप्टिकल केबल्स के जरिए ट्रैवल करता है. इन्हीं केबल्स की मदद से वीडियो, ईमेल और क्लाउड सेवा के साथ-साथ इंटरनेशनल डेटा ट्रांसफर होता है.
एक बार जब डेटा फाइबर केबल्स के जरिए आपके देश और शहर तक पहुंच जाता है तो इसे सबसे नजदीकी मोबाइल टावर पर रूट किया जाता है. मॉडर्न टावर सीधे फाइबर नेटवर्क से जुड़े होते हैं, जिससे डेटा वायरलेस होने से पहले कम से कम देरी और हाई स्पीड डिलीवरी पक्की होती है.
असली वायरलेस इंटरनेट सिर्फ मोबाइल टावर और आपके फोन के बीच होता है. टावर डेटा को रेडियो तरंगों में बदल देता है. इसके बाद आपका फोन उन तरंगों को रिसीव करता है और वापस टेक्स्ट, इमेज या वीडियो में डीकोड करता है.
इंटरनेट स्पीड इस्तेमाल किए गए फ्रीक्वेंसी बैंड पर काफी ज्यादा निर्भर करती है. 4G, 5G और शुरुआती 6G जैसे टेक्नोलॉजी अलग-अलग फ्रीक्वेंसी का इस्तेमाल करती हैं. ज्यादा फ्रीक्वेंसी ज्यादा डेटा ले जाती है और तेज स्पीड देती है.
यहां तक की वाई-फाई भी पूरी तरह से वायरलेस नहीं है. इंटरनेट आपके घर के राउटर तक एक फिजिकल ब्रॉडबैंड या फिर फाइबर केबल के जरिए पहुंचता है. फिर राउटर उस सिग्नल को रेडियो तरंगों में बदल देता है जिससे फोन और लैपटॉप एक कमरे या घर जैसे सीमित एरिया में वायरलेस तरीके से कनेक्ट हो पाते हैं.