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Baby Breathing: मां के पेट में सांस कैसे लेता है बच्चा, कौन सी साइंस करती है काम?

स्पर्श गोयल   |  01 Jun 2026 02:08 PM (IST)
Baby Breathing: मां के पेट में सांस कैसे लेता है बच्चा, कौन सी साइंस करती है काम?

Baby Breathing: मां के गर्भ में पल रहा बच्चा इंसानों की तरह अपनी नाक या फिर फेफड़ों से सांस नहीं लेता है. इसके बजाय भ्रूण काफी उन्नत जैविक प्रणाली के जरिए से सीधे मां के रक्त प्रवाह से ऑक्सीजन और पोषक तत्व प्राप्त करता है. भले ही बच्चा गर्भ के अंदर तरल पदार्थ से घिरा रहता है लेकिन प्रकृति ने एक खास तंत्र बनाया है जो जन्म से पहले ऑक्सीजन की आपूर्ति, वेस्ट रिमूवल और यहां तक की सांस लेने की भी सुविधा देता है. आइए जानते हैं इस बारे में पूरी जानकारी.

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प्लेसेंटा एक अस्थायी अंग है जो गर्भावस्था के दौरान गर्भाशय के अंदर विकसित होता है. यह मां और बच्चे के बीच एक पुल की तरह काम करता है. यह ऑक्सीजन और पोषक तत्वों को बच्चे तक पहुंचाने में मदद करता है और साथ ही भ्रूण के शरीर से वेस्ट मटेरियल को भी हटाता है.

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गर्भनाल बच्चों की नाभि को सीधे प्लेसेंटा से जोड़ती है. इस नाल के अंदर मौजूद रक्त वाहिकाएं पूरी गर्भावस्था के दौरान मां से भ्रूण तक ऑक्सीजन से भरपूर रक्त और पोषक तत्व पहुंचाती हैं.

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जब मां सांस लेती है तो ऑक्सीजन फेफड़ों के जरिए उसके रक्त प्रवाह में प्रवेश करती है. प्लेसेंटा के अंदर ऑक्सीजन स्वाभाविक रूप से मां के रक्त से बच्चों के रक्त में चली जाती है. दिलचस्प बात यह है कि मां और बच्चे का खून कभी भी सीधे आपस में नहीं मिलता है.

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गर्भ के अंदर पल रहे बच्चे में एक खास प्रकार का हीमोग्लोबिन होता है जिसे फैटल हीमोग्लोबिन कहा जाता है. यह हीमोग्लोबिन वयस्क हीमोग्लोबिन की तुलना में ऑक्सीजन को कहीं ज्यादा मजबूती से आकर्षित करता है. इससे भ्रूण मां के रक्त से ऑक्सीजन को काफी कुशलता से अवशोषित कर पाता है.

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भले ही भ्रूण हवा अंदर नहीं खींचता है लेकिन वह गर्भावस्था के लगभग 10वें से 12वें हफ्ते के आसपास सांस लेने की गतिविधि का अभ्यास करना शुरू कर देता है. इस दौरान बच्चा एम्नियोटिक द्रव अंदर खींचता और बाहर निकालता है. इससे फेफड़ों की मांसपेशियों को मजबूत बनाने और गर्भ के बाहर के जीवन के लिए फेफड़ों को तैयार करने में मदद मिलती है.

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जब बच्चा जन्म लेता है और बाहरी वातावरण के संपर्क में आता है तो वह रोते हुए अपनी पहली असली सांस लेता है. यह फेफड़ों से तरल पदार्थ को साफ करता है, हवा की छोटी-छोटी थैलियों को हवा से भर देता है और पहली बार बच्चों की अपनी श्वसन प्रणाली को सक्रिय करता है.

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