✕
  • होम
  • इंडिया
  • विश्व
  • उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड
  • बिहार
  • दिल्ली NCR
  • महाराष्ट्र
  • राजस्थान
  • मध्य प्रदेश
  • हरियाणा
  • पंजाब
  • झारखंड
  • गुजरात
  • छत्तीसगढ़
  • हिमाचल प्रदेश
  • जम्मू और कश्मीर
  • बॉलीवुड
  • ओटीटी
  • टेलीविजन
  • तमिल सिनेमा
  • भोजपुरी सिनेमा
  • मूवी रिव्यू
  • रीजनल सिनेमा
  • क्रिकेट
  • आईपीएल
  • कबड्डी
  • हॉकी
  • WWE
  • ओलिंपिक
  • धर्म
  • राशिफल
  • अंक ज्योतिष
  • वास्तु शास्त्र
  • ग्रह गोचर
  • एस्ट्रो स्पेशल
  • बिजनेस
  • हेल्थ
  • रिलेशनशिप
  • ट्रैवल
  • फ़ूड
  • पैरेंटिंग
  • फैशन
  • होम टिप्स
  • GK
  • टेक
  • ट्रेंडिंग
  • शिक्षा
  • ऑटो

Japan Elections: न रैली और न प्रचार... जापान में महज 12 दिन में कैसे होते हैं इलेक्शन, भारत से कितनी अलग प्रक्रिया?

स्पर्श गोयल   |  18 May 2026 03:19 PM (IST)
Japan Elections: न रैली और न प्रचार... जापान में महज 12 दिन में कैसे होते हैं इलेक्शन, भारत से कितनी अलग प्रक्रिया?

Japan Elections: जापान में चुनावों को दुनिया की सबसे अनुशासित और सख्ती से नियंत्रित लोकतंत्र प्रक्रिया में से एक माना जाता है. भारत के उलट जहां चुनावी अभियान अक्सर महीनों तक चलते हैं जापान एक असाधारण रूप से शांत और कंट्रोल्ड प्रणाली का पालन करता है. आइए जानते हैं कि कैसे होते हैं जापान में चुनाव.

1

जापान में निचले सदन के चुनावी अभियान कानूनी तौर पर सिर्फ 12 दिनों तक सीमित होते हैं. इसी के साथ ऊपरी सदन के अभियान 17 दिनों तक चल सकते हैं. आधिकारिक तौर पर स्वीकृत अवधि के बाहर चुनाव प्रचार करना पूरी तरह से प्रतिबंधित है. इसके उलट भारत में चुनाव अक्सर कई हफ्तों या फिर महीनों तक चलते हैं.

Continues below advertisement
2

जापानी कानून उम्मीदवारों को व्यक्तिगत रूप से घर-घर जाकर वोट मांगने से सख्ती से रोकता है. अधिकारियों का ऐसा मानना है कि इस तरह की बातचीत वोटर को अनुचित रूप से प्रभावित या फिर उन पर दबाव डाल सकती है. हालांकि भारत में घर-घर जाकर प्रचार करना सबसे आम राजनीतिक रणनीतियों में से एक है. इसमें उम्मीदवार सीधे मतदाताओं से मिलते हैं, पर्चे बांटते हैं और स्थानीय स्तर पर जनसंपर्क अभियान चलाते हैं.

Continues below advertisement
3

भारत की बड़ी चुनावी रैलियों और जोरदार रोड शो के उलट जापान के चुनावी अभियान काफी ज्यादा शांत होते हैं. उम्मीदवार आमतौर पर लाउडस्पीकर लगी छोटी वैन का इस्तेमाल करके प्रचार करते हैं और रेलवे स्टेशन या फिर व्यस्त चौराहों पर भाषण देते हैं. शोर के स्तर को भी कंट्रोल किया जाता है. दूसरी तरफ भारत के चुनाव में अक्सर भारी भीड़, भव्य मंच, हेलीकॉप्टर दौरे और बड़े राजनीतिक जुलूस निकाले जाते हैं.

4

जापान चुनावी पोस्टर और विज्ञापन पर कड़ी पाबंदियां लगाता है. उम्मीदवार सिर्फ चुनाव अधिकारियों द्वारा उपलब्ध कराए गए आधिकारिक रूप से निर्धारित सार्वजनिक बोर्ड पर ही पोस्टर लगा सकते हैं. इधर-उधर बैनर लगाना, दीवार पर पोस्टर चिपकाना और काफी ज्यादा राजनीतिक विज्ञापन करना पूरी तरह से प्रतिबंधित है. भारत में चुनावी मौसम के दौरान आमतौर पर शहर पोस्टर, होर्डिंग्स, बैनर और टेलीविजन के साथ-साथ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर डिजिटल राजनीतिक विज्ञापनों से भरे हुए नजर आते हैं.

5

जापान का चुनाव कानून विभाजनकारी राजनीति के खिलाफ काफी सख्त रुख अपनाता है. अगर उम्मीदवार धर्म के नाम पर वोट मांगते हैं या फिर सामाजिक विभाजन पैदा करने की कोशिश करते हैं तो उन्हें तुरंत अयोग्य घोषित किया जा सकता है. हालांकि भारत में धर्म, जाति और क्षेत्रीय पहचान अक्सर राजनीतिक अभियान और भाषण का मुख्य विषय बन जाते हैं.

6

जापान चुनावी अभियान पर खर्च की सीमा लागू करता है और उम्मीदवारों को सरकार द्वारा समर्थित सुविधा जैसे कि मुफ्त परिचय छपवाना और समान सार्वजनिक सहायता प्रदान करता है. राजनीतिक चंदे का भी पूरी तरह से खुलासा किया जाता है. वहीं भारतीय चुनाव में अक्सर चुनावी अभियानों पर काफी ज्यादा खर्च होता है और विज्ञापन के बड़े बजट होते हैं.

  • हिंदी न्यूज़
  • फोटो गैलरी
  • जनरल नॉलेज
  • Japan Elections: न रैली और न प्रचार... जापान में महज 12 दिन में कैसे होते हैं इलेक्शन, भारत से कितनी अलग प्रक्रिया?
Continues below advertisement
About us | Advertisement| Privacy policy
© Copyright@2026.ABP Network Private Limited. All rights reserved.