राजस्थान के इस किले को क्यों कहते हैं कुंवारा किला? इसके पीछे है ये दिलचस्प कारण

दुनियाभर में आपने कई ऐसे रहस्यमयी किलों, महलों और जगहों के बारे में सुना होगा जिनके रहस्यों को जानकर आपको हैरानी होती होगी. भारत में भी ऐसे कई किले हैं, जिन्हें अपने रोचक किस्से और कहानियों के लिए जाना जाता है.
भारत का राजस्थान एक ऐसी जगह है जहां कई राजा महाराजाओं के किले हैं, चित्तौड़गढ़ किला, हवा महल, जल महल आदि किलों के बारे में तो आपने कई बार सुना होगा, लेकिन क्या आपने कभी कुंवारा किले के बारे में सुना है ?
अगर नहीं, तो चलिए जानते हैं इस किले को कुंवारा किला क्यों कहा जाता है और इसके पीछे की क्या कहानी है, जो इस किले को एक रहस्मयी किला बनाती है.
दरअसल राजस्थान के अलवर में मौजूद कुंवारा किले को कुछ इस तरह बनाया गया है ताकि इस किले से कोई भी दुश्मन बच के न जा पाए. इस किले को बाला किले के नाम से भी जाना जाता है, तो वहीं इस किले की एक खास विशेषता है कि इसपर कभी युद्ध नहीं हुआ और किसी ने भी इसको नहीं जीता.
कुंवारा का मतलब होता है अविवाहित और कुंवारा किले को कभी कोई जीत कर अपना नहीं बना सका, जिस कारण के चलते इसका नाम कुंवारा किला रखा गया था. तो वहीं इस किले को साल 1550 में हसन खान मेवाती ने बनवाया था.
इसके साथ ही अगर आप कभी भी इस किले को पास से देखते हैं तो आपको इस किले की दीवारों पर 446 छेद बने हुए नजर आएंगे ताकि इन छेदों की मदद से 10 फुट की दूरी से ही दुशमन पर गोली चलाना आसान हो सके.
तो वहीं ऐसा माना जाता है कि इस किले के अंदर धन के देवता कुबेर का खजाना भी छुपा हुआ है. हालांकि इस किले में कुछ समय मुगल शासक बाबर और जहांगीर ने भी बिताया था.