बिना ताले-दीवार वाली जेल, फिर भी कैदी भागते नहीं; हैरान कर देगी वजह
ग्रीनलैंड की जेल व्यवस्था दुनिया से बिल्कुल अलग है. यहां ओपन प्रिजन सिस्टम लागू है, जिसमें सजा का मकसद सिर्फ दंड देना नहीं, बल्कि इंसान को बेहतर बनाना है. कई जेलों में न तो ऊंची दीवारें हैं और न ही लोहे के मजबूत गेट.
इसके बावजूद यहां से भागने की घटनाएं बेहद कम हैं. वजह है समाज की बनावट और सोच. ग्रीनलैंड में जेलों को अक्सर नाइट जेल कहा जाता है. इसका मतलब यह है कि कैदी दिन के समय बाहर जा सकते हैं.
वे नौकरी कर सकते हैं, पढ़ाई कर सकते हैं, स्किल ट्रेनिंग ले सकते हैं या फिर शिकार और आउटडोर एक्टिविटी में हिस्सा ले सकते हैं. शाम होते ही सभी कैदी वापस जेल लौट आते हैं. इस व्यवस्था से कैदियों का समाज से रिश्ता बना रहता है.
ग्रीनलैंड की कुल आबादी करीब 57 हजार है. यहां ‘एवरीबडी नोज एवरीबडी’ वाली स्थिति है. अगर कोई व्यक्ति नियम तोड़ता है या भागने की कोशिश करता है, तो उसकी खबर पूरे इलाके में फैल जाती है.
ऐसे में छिप पाना लगभग नामुमकिन हो जाता है. सामाजिक पहचान और भरोसा यहां सबसे बड़ा पहरा है. ग्रीनलैंड की राजधानी में बनी न्यूक जेल 2019 में शुरू हुई थी. यह एक आधुनिक और साफ-सुथरी जेल है, जहां कैदियों को खुद खाना बनाने की आजादी है.
उन्हें फोन इस्तेमाल करने और परिवार से संपर्क में रहने की अनुमति भी मिलती है. मकसद यह है कि कैदी खुद को समाज से कटा हुआ महसूस न करें. ग्रीनलैंड की जेल नीति का आधार है कि हर इंसान समाज के लिए जरूरी है.
यहां कैदियों को जिम्मेदारी दी जाती है, ताकि वे खुद को उपयोगी महसूस करें. खेल, वॉक और आउटडोर काम जैसी गतिविधियां मानसिक संतुलन बनाए रखने में मदद करती हैं. यही वजह है कि जेल इंसान को तोड़ने की बजाय उसे सुधारने का जरिया बनती है.
पहले गंभीर अपराधों में ग्रीनलैंड के कैदियों को डेनमार्क भेजा जाता था, लेकिन अब नीति बदली गई है. कैदियों को अपने ही देश में रखा जाता है, ताकि भाषा, परिवार और संस्कृति से उनका जुड़ाव बना रहे. इससे सुधार की प्रक्रिया ज्यादा असरदार होती है.
असल वजह डर नहीं, भरोसा है. कैदियों को पता है कि भागने से उनका भविष्य और खराब होगा. समाज का छोटा ढांचा, जिम्मेदारी की भावना और सम्मानजनक व्यवहार उन्हें नियमों में बांधे रखता है. यही ग्रीनलैंड की जेल व्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत है.