✕
  • होम
  • इंडिया
  • विश्व
  • उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड
  • बिहार
  • दिल्ली NCR
  • महाराष्ट्र
  • राजस्थान
  • मध्य प्रदेश
  • हरियाणा
  • पंजाब
  • झारखंड
  • गुजरात
  • छत्तीसगढ़
  • हिमाचल प्रदेश
  • जम्मू और कश्मीर
  • बॉलीवुड
  • ओटीटी
  • टेलीविजन
  • तमिल सिनेमा
  • भोजपुरी सिनेमा
  • मूवी रिव्यू
  • रीजनल सिनेमा
  • क्रिकेट
  • आईपीएल
  • कबड्डी
  • हॉकी
  • WWE
  • ओलिंपिक
  • धर्म
  • राशिफल
  • अंक ज्योतिष
  • वास्तु शास्त्र
  • ग्रह गोचर
  • एस्ट्रो स्पेशल
  • बिजनेस
  • हेल्थ
  • रिलेशनशिप
  • ट्रैवल
  • फ़ूड
  • पैरेंटिंग
  • फैशन
  • होम टिप्स
  • GK
  • टेक
  • ट्रेंडिंग
  • शिक्षा
  • ऑटो

नारियल के अंदर कहां से आता है इतना साफ और मीठा पानी, आखिर क्या है इसका वैज्ञानिक प्रोसेस

निधि पाल   |  30 May 2026 06:48 AM (IST)
नारियल के अंदर कहां से आता है इतना साफ और मीठा पानी, आखिर क्या है इसका वैज्ञानिक प्रोसेस

चिलचिलाती गर्मी और धूप से राहत पाने के लिए सड़क किनारे बिकने वाला नारियल पानी सबसे बेहतरीन और सेहतमंद विकल्प माना जाता है. इसे पीते ही शरीर में तुरंत ताजगी और ऊर्जा का अहसास होने लगता है. लेकिन क्या आपने कभी शांत दिमाग से यह सोचा है कि चारों तरफ से पूरी तरह कड़े छिलके से बंद इस फल के भीतर इतना साफ और हल्का मीठा पानी कहां से आ जाता है? यह कोई जादू नहीं, बल्कि पेड़ के भीतर चलने वाली एक बेहद अनूठी और जटिल वैज्ञानिक प्रक्रिया है, जिसे प्रकृति ने बहुत खूबसूरती से डिजाइन किया है.

1

नारियल के पेड़ काफी ऊंचे होते हैं और उनके फल सबसे ऊपरी हिस्से पर लगते हैं. इस ऊंचाई तक पानी पहुंचाने के लिए पेड़ की जड़ें जमीन के काफी नीचे से नमी और जरूरी पोषक तत्वों को अवशोषित करती हैं.

Continues below advertisement
2

इस खींचे गए पानी को पेड़ के तने में मौजूद जाइलम नाम के विशेष टिश्यू (ऊतक) ऊपर की तरफ ले जाते हैं. यह पानी ऑस्मोसिस की प्रक्रिया के जरिए गुरुत्वाकर्षण के विपरीत पेड़ के सबसे ऊंचे हिस्से पर मौजूद नारियल के फलों तक पहुंचता है और धीरे-धीरे उसके अंदर इकट्ठा होने लगता है.

Continues below advertisement
3

विज्ञान की भाषा में बात करें तो नारियल के भीतर जमा होने वाले इस साफ तरल पदार्थ को एंडोस्पर्म कहा जाता है. यह असल में एक न्यूट्रिशन से भरपूर लिक्विड होता है, जिसका मुख्य काम नारियल के बीज को विकसित होने के लिए लगातार पोषण देना है.

4

जब नारियल कच्चा और हरा होता है, तब उसके अंदर का अधिकांश हिस्सा इसी लिक्विड एंडोस्पर्म यानी पानी से पूरी तरह भरा होता है. चूंकि यह पानी पेड़ की पूरी परिवहन प्रणाली से छनकर ऊपर पहुंचता है, इसलिए यह पूरी तरह शुद्ध और बैक्टीरिया मुक्त होता है.

5

जैसे-जैसे समय बीतता है और नारियल का फल पकने की अवस्था में पहुंचता है, इसके भीतर एक और रासायनिक बदलाव शुरू होता है. यह लिक्विड एंडोस्पर्म धीरे-धीरे गाढ़ा होने लगता है और नारियल की अंदरूनी दीवारों पर जमना शुरू कर देता है.

6

शुरुआत में यह जमा हुआ हिस्सा बेहद मुलायम और जेली जैसा होता है, जिसे हम नारियल की मलाई कहते हैं. वक्त के साथ यही मलाई सख्त होकर सफेद गरी या खोपरा बन जाती है, और जो अतिरिक्त पानी बच जाता है वही अंत तक लिक्विड फॉर्म में रहता है.

7

अक्सर लोग सोचते हैं कि नारियल का पानी इतना हल्का मीठा क्यों लगता है. दरअसल, जब पेड़ अपनी जड़ों से पानी ऊपर भेजता है, तो उसमें जमीन के मिनरल्स के साथ-साथ पेड़ के पत्तों द्वारा तैयार किए गए प्राकृतिक शुगर और एंजाइम्स भी मिल जाते हैं.

8

प्रकृति की इस बेहतरीन फिल्टर प्रणाली के कारण इसमें बाहर की धूल या गंदगी का प्रवेश नामुमकिन होता है. पूरी तरह प्राकृतिक सील पैक होने की वजह से ही यह पानी हमेशा मिनरल वाटर से भी ज्यादा साफ, ताजा और प्राकृतिक मिठास से भरपूर बना रहता है.

9

नारियल पानी को केवल प्यास बुझाने का साधन नहीं, बल्कि सेहत के लिए एक बेहतरीन नेचुरल एनर्जी ड्रिंक माना जाता है. इस पानी के भीतर प्रचुर मात्रा में पोटैशियम, मैग्नीशियम, कैल्शियम और सोडियम जैसे जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स पाए जाते हैं.

  • हिंदी न्यूज़
  • फोटो गैलरी
  • जनरल नॉलेज
  • नारियल के अंदर कहां से आता है इतना साफ और मीठा पानी, आखिर क्या है इसका वैज्ञानिक प्रोसेस
Continues below advertisement
About us | Advertisement| Privacy policy
© Copyright@2026.ABP Network Private Limited. All rights reserved.