हल्दी से काली मिर्च तक, दुनियाभर के किचन में कैसे छा गए भारतीय मसाले?
भारत और मसालों का रिश्ता हजारों साल पुराना है. ऐतिहासिक दस्तावेज बताते हैं कि रोम और मिस्र की सभ्यताओं तक भारतीय मसाले पहुंचते थे.
उस दौर में काली मिर्च को ब्लैक गोल्ड कहा जाता था, क्योंकि इसकी कीमत सोने के बराबर थी. यूरोप के व्यापारी भारत तक सिर्फ मसाले खरीदने समुद्री मार्ग तलाशते थे. यही कारण था कि वास्को-डी-गामा और कोलंबस जैसे खोजी यात्रियों ने भारत तक के रास्ते ढूंढने की कोशिश की.
हल्दी का इस्तेमाल भारतीय रसोई में केवल रंग और स्वाद के लिए ही नहीं, बल्कि आयुर्वेदिक औषधि के रूप में भी होता आया है. आज दुनिया भर में Turmeric Latte या Golden Milk हेल्थ ड्रिंक के रूप में लोकप्रिय है.
अमेरिका और यूरोप में हल्दी को सुपरफूड के तौर पर अपनाया जा चुका है. इसकी एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-बैक्टीरियल प्रॉपर्टीज इसे मेडिकल रिसर्च में भी अहम बनाती हैं.
क्वीन ऑफ स्पाइसेस कही जाने वाली इलायची का इस्तेमाल केवल भारतीय मिठाइयों या चाय तक सीमित नहीं रहा. अरब देशों में कॉफी बनाने में इसका खास इस्तेमाल होता है. यूरोपियन डेजर्ट्स में भी इलायची का तड़का अब आम है. भारत इलायची का सबसे बड़ा उत्पादक देश है और इसकी वैश्विक मांग लगातार बढ़ रही है.
दालचीनी का स्वाद मीठे और नमकीन दोनों व्यंजनों में काम आता है. मिडिल ईस्ट की बिरयानी से लेकर यूरोपियन सिनेमन रोल तक, दालचीनी ने हर संस्कृति में अपनी जगह बना ली है. इसकी खासियत यह है कि यह केवल स्वाद ही नहीं बढ़ाती, बल्कि शुगर कंट्रोल और डाइजेशन में भी मददगार साबित होती है.
काली मिर्च भारतीय मसालों में सबसे अहम मानी जाती है. इसे एक समय पर मुद्रा की तरह इस्तेमाल किया जाता था. आज भी फ्रेंच, इटैलियन और अमेरिकन किचन से लेकर एशियन डिशेज तक, हर जगह इसका इस्तेमाल होता है. भारत और वियतनाम दुनिया के सबसे बड़े सप्लायर हैं, लेकिन भारतीय काली मिर्च की खुशबू और क्वालिटी इसे खास बनाती है.