Snake Naming: किंग कोबरा से लेकर पायथन तक...कौन रखता है सांपों के नाम, जानें क्या होती है प्रकिया

Snake Naming: क्या आपने कभी सोचा है कि यह कौन तय करता है कि किस सांप को क्या कहा जाएगा? किसी भी सांप का नाम ना तो मनमाने तरीके से रखा जाता है और ना ही अंदाजे लगाए जाते हैं. दरअसल इसके पीछे एक पूरी प्रक्रिया होती है. आइए जानते हैं कैसे रखा जाता है किसी सांप का नाम.
यह प्रक्रिया तब शुरू होती है जब वैज्ञानिक सांप की किसी नई प्रजाति की खोज करते हैं. वे उसकी शारीरिक बनावट, आवास, व्यवहार और यहां तक की डीएनए का भी अध्ययन करते हैं. ऐसा इसलिए ताकि यह पुष्टि हो सके कि वह वास्तव में पहले से ज्ञात प्रजातियों से अलग है.
एक बार पुष्टि हो जाने पर शोधकर्ताओं को अपने फैसलों को एक औपचारिक वैज्ञानिक शोध पत्र में प्रकाशित करना जरूरी होता है. यह दस्तावेज सांप का एक पूरा विवरण प्रस्तुत करता है. इसमें यह भी बताया जाता है कि वह दूसरी प्रजातियों से किस तरह अलग है. प्रकाशन के बिना नाम को आधिकारिक मान्यता नहीं मिलती.
वैज्ञानिक नाम ज्यादातर लैटिन या फिर ग्रीक भाषाओं से ही लिए जाते हैं. ये नाम सांप की शारीरिक बनावट, व्यवहार और उस स्थान को दर्शाते हैं जहां से वह पाया गया था. कभी-कभी यह नाम वैज्ञानिकों और कुछ खास व्यक्तियों के सम्मान में भी रखे जाते हैं.
हर सांप को दो भाग वाला वैज्ञानिक नाम दिया जाता है. पहला भाग वंश को दर्शाता है और दूसरा भाग प्रजाति को. उदाहरण के लिए किंग कोबरा को ophiophagus Hannah कहते हैं.
सांपों के कुछ नाम अपने आप में एक कहानी बयां करते हैं. पाइथन शब्द प्राचीन ग्रीक पौराणिक कथाओं से लिया गया है. इसी के साथ रसल वाइपर का नाम पैट्रिक रसेल नाम के एक प्रकृतिवादी के नाम पर रखा गया है.
इंटरनेशनल कमिशन ऑन जूलॉजिकल नोमेनक्लेचर कुछ नियमों को सख्ती से लागू करता है. जैसे किसी भी दो प्रजातियों का नाम एक जैसा नहीं हो सकता और सबसे पहले प्रकाशित नाम को ही मान्यता दी जाती है.