कश्मीर से कन्याकुमारी...फाइटर जेट पहले पहुंचेगा या ब्रह्मोस मिसाइल, जान लें दोनों की स्पीड?
सबसे पहले बात करें फाइटर जेट की. आधुनिक लड़ाकू विमान जैसे तेजस, सुखोई या दूसरे गेगन-टुकड़ों में हवा में बहुत जल्दी उड़ते हैं, लेकिन उनकी औसत यात्रा-गति और रुट अगल-बगल बदल सकती है.
अगर हम यह मानें कि एक जेट कश्मीर से कन्याकुमारी की दूरी लगभग साढ़े तीन घंटे में ही तय कर सकता है (हालांकि यह दूरी और समय लगभग अनुमानित हैं), तब यह जाहिर है कि जेट बहुत तेज है, लेकिन वो मिसाइल की गति तक नहीं पहुंच पाता है. इसको पहुंचने में तकरीबन डेढ़ घंटा लगेगा.
दूसरी ओर है ब्रहमोस मिसाइल की बात करें तो भारत-रूस की जॉइंट क्रूज मिसाइल, जो अपने कोर्स में बेहद तेज होती है. यह मिसाइल मैच 2.8 की रफ्तार तक पहुंच सकती है.
इस स्पीड के साथ अगर इसकी उड़ान सही दिशा में हो तो यह बहुत कम समय में बड़ी दूरी तय कर सकती है. मिसाइल की Mach-2.8 की गति का मतलब है कि यह ध्वनि की गति से लगभग 2.8 गुना तेज है.
इस हिसाब से ब्रह्मोस मिसाइल इस दूसरी को लगभग 5 मिनट में पार कर सकती है. उस दर से कि इसकी क्रूज रफ्तार और रास्ता बिल्कुल सीधा हो.
जेट में पायलट, ईंधन, टेकऑफ और लैंडिंग जैसी अनेक चीजें होते हैं, जिनमें समय लगता है. वहीं ब्रह्मोस मिसाइल को एक बार लॉन्च किया जाए, और वह पलक झपकते लक्ष्य की ओर बढ़ जाती है.
फिर सवाल उठता है कि अगर ऐसी स्थिति आए, तो युद्ध-परिस्थितियों में निर्णय लेने में रणनीति कैसे बदलेगी? क्या जेट पहले पहुंच कर लक्ष्य पर हमला करेगा, या मिसाइल को मौका दिया जाएगा क्योंकि उसकी तीव्रता ज्यादा है?