बोतल में बच गई शराब की क्या खराब हो जाती है क्वालिटी, नशे और टेस्ट में भी आता है अंतर?
शराब की क्वालिटी सिर्फ उसकी कीमत या ब्रांड पर निर्भर नहीं करती, बल्कि इस बात पर भी कि उसे कैसे और कितने समय तक स्टोर किया गया है. बहुत से लोग यह मान लेते हैं कि शराब कभी खराब नहीं होती, लेकिन यह आधा सच है.
हकीकत यह है कि शराब के हर प्रकार- बीयर, वाइन, व्हिस्की, रम, ब्रांडी या टकीला की अपनी अलग शेल्फ लाइफ और अपनी अलग रिएक्शन प्रक्रिया होती है. खासकर बोतल खुलने के बाद इसमें होने वाला बदलाव धीरे-धीरे इसे बेस्वाद और असरहीन बना सकता है.
जैसे ही बोतल खोली जाती है, शराब हवा के संपर्क में आ जाती है. इस ऑक्सीकरण के कारण उसके फ्लेवर कंपाउंड टूटने लगते हैं. वाइन में यह प्रक्रिया सबसे तेज होती है. कुछ ही घंटों में उसका स्वाद फीका, खट्टा और बिल्कुल अलग हो सकता है. व्हिस्की और रम जैसी स्पिरिट्स में यह बदलाव धीरे-धीरे होता है, लेकिन लंबे समय में इनका असली स्वाद कमजोर पड़ जाता है.
खुली बोतल में अल्कोहल धीरे-धीरे उड़ने लगता है, जिससे नशा कम होने लगता है. खासकर वाइन और बीयर में यह प्रक्रिया तेजी से होती है क्योंकि इनका अल्कोहल कंटेंट कम होता है.
कांच की बोतलें शराब के लिए सबसे सुरक्षित मानी जाती हैं, लेकिन अगर शराब प्लास्टिक या धातु में ट्रांसफर कर दी जाए तो उसके स्वाद और सुगंध में अप्राकृतिक बदलाव आ सकता है.
वाइन खुलने के बाद सिर्फ 2-3 दिनों में ही स्वाद बदलना शुरू हो जाता है. रेड वाइन थोड़ी लंबी चलती है, लेकिन व्हाइट वाइन जल्दी खराब होती है. वहीं बीयर तो खुलने के कुछ घंटों में ही अपनी गैस और फ्लेवर खो देती है. अगले दिन तक यह लगभग बेस्वाद हो जाती है.
व्हिस्की, रम, वोदका, जिन, टकीला इनमें अल्कोहल की मात्रा ज्यादा होने के कारण ये जल्दी खराब नहीं होतीं, लेकिन इनके फ्लेवर कंपाउंड हवा, रोशनी और तापमान से धीरे-धीरे कमजोर हो जाते हैं. 10-12 महीने में इनका टेस्ट हल्का और सुगंध कम हो सकती है.