Moon Flag: क्या हमेशा लगा रहता है चांद पर पहुंचने वाले देश का झंडा, वहां के तापमान का उन पर कितना असर?

Moon Flag: चांद पर राष्ट्रीय झंडा लगाना अंतरिक्ष की खोज के सबसे बड़े प्रतीकों में से एक माना जाता है. लेकिन पृथ्वी के उलट चांद का कठोर वातावरण समय के साथ इन झंडों को धीरे-धीरे बदल देता है. हालांकि अपोलो मिशन के दौरान लगाए गए ज्यादातर झंडे अभी भी खड़े हैं लेकिन उनके रूप में काफी बदलाव आया है.
नासा के लूनर रिकॉनिसेंस आर्बिटल की तस्वीरों से यह पता चलता है कि अपोलो मिशन में 6 में से 5 झंडा अभी भी खड़े हैं. जबकि अपोलो 11 का झंडा अंतरिक्ष यात्रियों के जाने के कुछ ही समय बाद लूनर मॉड्यूल के रॉकेट से निकलने वाली गैस के दबाव की वजह से गिर गया था.
चांद पर हानिकारक अल्ट्रावायलेट विकिरण को रोकने के लिए कोई वायुमंडल नहीं है. इससे नायलॉन के झंडों का लाल और नीला रंग समय के साथ पूरी तरह से फीका पड़ जाता है. आखिर में वे पूरी तरह से सफेद दिखने लगते हैं.
तापमान में काफी ज्यादा उधर चढ़ाव चांद पर दिल के समय लगभग 127 डिग्री सेल्सियस से लेकर रात में लगभग - 173 डिग्री सेल्सियस तक, ने बार-बार फैलने और सिकुड़ने की प्रक्रिया से झंडों को काफी कमजोर कर दिया है.
वैज्ञानिकों को ऐसा कहना है कि दशकों तक विकिरण और काफी ज्यादा तापमान के संपर्क में रहने की वजह से नायलॉन का कपड़ा काफी भंगुर हो गया है. अगर आज उन्हें छुआ तो झंडे शायद बिखर जाएंगे.
क्योंकि चांद पर कोई हवा नहीं चलती इस वजह से अपोलो मिशन के झंडों को क्षेतिज सपोर्ट रॉड वाले खंभों पर लगाया गया था. इससे हवा न होने के बावजूद वे लहराते हुए दिखाई देते थे.
अमेरिका के अलावा चीन और भारत जैसे देशों ने भी चांद पर अपने झंडे स्थापित किए हैं. चंद्रयान 3 मिशन के जरिए भारत ने चांद के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र के पास तिरंगे और इसरो के लोगो की छाप छोड़ी है.