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Property Rights In Islam: क्या इस्लाम में भी बेटी को होता है पिता की संपत्ति में अधिकार, जान लें नियम?

स्पर्श गोयल   |  23 Jan 2026 01:49 PM (IST)
Property Rights In Islam: क्या इस्लाम में भी बेटी को होता है पिता की संपत्ति में अधिकार, जान लें नियम?

Property Rights In Islam: एक आम गलतफहमी है कि इस्लाम में बेटियों को विरासत का अधिकार नहीं होता. लेकिन आपको बता दें कि इस्लामी कानून साफ तौर पर बेटियों को उनके पिता की संपत्ति में एक तय और सुरक्षित हिस्सा देता है. आइए जानते हैं क्या कहता है इस्लामी कानून.

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इस्लामी विरासत के नियमों के तहत बेटी जन्म से ही कानूनी वारिस होती है. अगर मरने वाले पिता के पास बेटा और बेटी दोनों है तो बेटी को बेटे के हिस्से का आधा हिस्सा मिलता है. यह अंतर इस्लाम में पुरुषों पर डाली गई वित्तीय जिम्मेदारियों से जुड़ा हुआ है.

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अगर किसी पिता की मृत्यु हो जाती है और उसकी सिर्फ एक बेटी है और कोई बेटा नहीं है तो बेटी कुल संपत्ति के आधे हिस्से की हकदार होती है. अगर पिता की दो या दो से ज्यादा बेटियां हैं और कोई बेटा नहीं है तो उन्हें सामूहिक रूप से संपत्ति का दो तिहाई हिस्सा मिलता है और उसे फिर उनके बीच बराबर बांटा जाता है.

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पिता की संपत्ति पर बेटी का अधिकार शादी के बाद खत्म नहीं होता. दूसरे घर का हिस्सा बनने के बाद भी वह अपने पिता की संपत्ति की कानूनी वारिस बनी रहती है.

4

इस्लाम वसीयत के इस्तेमाल को सख्ती से सीमित करता है. एक इंसान अपनी संपत्ति का सिर्फ एक तिहाई हिस्सा ही दे सकता है और वह भी कानूनी वारिसों को नहीं दिया जा सकता जब तक की बाकी सभी वारिस सहमती ना दें.

5

बेटी का विरासत का हिस्सा ईश्वर के द्वारा दिया गया अधिकार माना जाता है ना कि परिवार की तरफ से कोई एहसान. सामाजिक रीति रिवाज, भावनात्मक दबाव, या फिर मौखिक वादे इस्लामी कानून के तहत इस अधिकार को कानूनी रूप से खत्म नहीं कर सकते.

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इस्लाम बेटी को विरासत से अलग करने को एक गंभीर पाप मानता है. कुरान साफ तौर पर सही वारिसों की संपत्ति को गलत तरीके से इस्तेमाल करने के खिलाफ चेतावनी देता है.

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