Doppelganger: क्या सच में दुनिया में होते हैं एक शक्ल के 7 लोग? जानें इसके पीछे का साइंस और इसकी असलियत

Doppelganger: यह बात दशकों से मानी जाती आ रही है कि दुनिया में हर इंसान के सात हमशक्ल होते हैं. हालांकि इस बात का कोई भी वैज्ञानिक सबूत नहीं है और इसे लोक कथाओं पर ही आधारित एक मिथक माना जाता है. शोधकर्ताओं के मुताबिक भले ही अनजान लोग एक दूसरे जैसे दिख सकते हैं लेकिन 100% एक जैसा चेहरा पाने की संभावना काफी कम होती है. आइए जानते हैं इस बारे में पूरी जानकारी.
इस बात का कोई भी वैज्ञानिक सबूत नहीं है कि दुनिया में हर व्यक्ति के सात हमशक्ल होते हैं. इसे एक मशहूर मिथक माना जाता है जो लोक कथाओं से चला आ रहा है.
एडेलेड यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स ने चेहरे के कई अहम मापों का एनालिसिस किया और पाया कि दो अनजान लोगों के चेहरे के सभी मुख्य फीचर्स पूरी तरह से मेल खाने की संभावना लगभग 1 ट्रिलियन में से एक है. दुनिया की आबादी लगभग 8 अरब है इस वजह से ऐसा सटीक मेल लगभग नामुमकिन ही माना जाता है.
इंसान चेहरों को सटीक माप के बजाय उनके कुल लुक से पहचानते हैं. एक जैसे हेयर स्टाइल, चेहरे के बाल, आंखों का रंग या फिर हाल भाव दो अनजान लोगों को लगभग एक जैसा दिखा सकते हैं. भले ही उनके चेहरे की बनावट में अहम अंतर हो.
हालांकि हर इंसान का लगभग 99.9% डीएनए एक जैसा ही होता है लेकिन चेहरे का लुक सिर्फ एक छोटे हिस्से से तय होता है. ऐसा इसलिए क्योंकि अरबों लोगों में कई जेनेटिक गुण एक जैसे होते हैं. इस वजह से अनजान लोगों के चेहरे बिना किसी बायोलॉजिकल संबंध के भी काफी हद तक एक जैसे हो सकते हैं.
वैज्ञानिक रिसर्च में ऐसे अनजान लोग देखने को मिले हैं जिनके चेहरे में काफी समानताएं हैं. इन्हें कभी-कभी ट्विन स्ट्रेंजर्स कहा जाता है. इन लोगों में चेहरे के फीचर्स को प्रभावित करने वाले कुछ जेनेटिक पैटर्न एक जैसे हो सकते हैं.
इस खास दावे का की हर किसी के सात हमशक्ल होते हैं कोई भी वैज्ञानिक आधार नहीं है. ऐसा कहा जाता है कि यह बात पुरानी लोक कथा, कहानियों की परंपरा और बाद में मनोवैज्ञानिक व्याख्याओं से निकली है.