क्या सच में उल्लू को दिन में नहीं दिखता, जानें क्या है इसका सच?

Owl Vision: आमतौर पर ऐसा माना जाता है कि उल्लू दिन में नहीं देख सकते और सिर्फ रात में ही देख सकते हैं. लेकिन इसके पीछे की सच्चाई कुछ और है. दरअसल तेज धूप से उन्हें चकाचौंध और परेशानी हो सकती है. आइए जानते हैं इस बारे में पूरी जानकारी.
उल्लू दिन की रोशनी में अंधे नहीं होते हैं. उनकी आंखें तेज और कम रोशनी दोनों स्थिति में काम करती हैं. हालांकि उनकी देखने की क्षमता खास तौर पर कम रोशनी वाले माहौल के लिए बनी होती हैं. यही वजह है कि उल्लू सीधी धूप में रहने के बजाय छायादार जगह पर आराम करना पसंद करते हैं.
उल्लू की आंखें और पुतलियां बड़ी होती हैं. इसी वजह से उन्हें अंधेरे में भी अच्छी तरह से रोशनी इकट्ठा करने में मदद मिलती है. तेज धूप में उन्हें चकाचौंध महसूस हो सकती है.
उल्लू की रेटिना में रोशनी के प्रति संवेदनशील कई कोशिकाएं होती हैं जिन्हें रॉड सेल्स कहा जाता है. यह कोशिकाएं अंधेरे माहौल में रोशनी का पता लगाने में काफी असरदार होती हैं. उल्लू की आंखों में इंसानी आंखों की तुलना में लगभग 30 गुना ज्यादा रॉड सेल्स होते हैं.
कोन सेल्स जानवरों को रंगों में अंतर करने में मदद करते हैं और तेज रोशनी में बेहतर काम करते हैं. रॉड सेल्स की तुलना में उल्लू में कोन सेल्स काफी कम होते हैं. यही वजह है कि दिन में सक्रिय रहने वाले कई पशुओं की तुलना में रंगों में अंतर करने की उनकी क्षमता सीमित होती है.
उल्लू की आंखों की बनावट ऐसी होती है कि वह कम रोशनी में भी ज्यादा से ज्यादा प्रकाश इकट्ठा कर सकती हैं. इससे वे रात में शिकार करने में माहिर होते हैं. इस खासियत की वजह से कई प्रजातियां कम रोशनी में भी हलचल को भाप लेती हैं और शिकार का पता लगा लेती हैं.
ज्यादातर उल्लू रात में सक्रिय रहने वाले होते हैं. कम रोशनी में भी साफ देख पाने की उनकी बेहतरीन क्षमता उन्हें अंधेरा होने के बाद शिकार करने और भोजन खोजने में मदद करती है.
हर उल्लू का रूटीन सिर्फ रात का नहीं होता. कुछ उल्लू दिन में भी सक्रिय रहते हैं. इसी के साथ कुछ उल्लू सुबह और शाम के समय ज्यादा सक्रिय रहते हैं.
स्नोई उल्लू और शर्ट ईयर्ड उल्लू दिल की रोशनी में भी शिकार कर सकते हैं. यहीं से पता चलता है कि हर उल्लू दिनभर नहीं सोता बल्कि कुछ दिन में शिकार कर सकते हैं.