Flying Snake: क्या सच में होते हैं उड़ने वाले सांप, क्या इनमें भी होता है जहर?

Flying Snake: उड़ने वाले सांप सुनने में किसी पौराणिक कथा या फिर फेंटेसी फिल्म की चीज लगते हैं. लेकिन यह अनोखे सांप असल में मौजूद हैं. मुख्य रूप से दक्षिण और दक्षिण पूर्व एशिया के घने जंगलों में पाए जाने वाले इन सांपों में बिना पंखों के एक पेड़ से दूसरे पेड़ तक हवा में तैरने की हैरान करने वाली क्षमता होती है. आइए जानते हैं उनके बारे में और जानकारी.
यह सांप पक्षियों या चमगादड़ों की तरह पंख फड़फड़ा कर नहीं उड़ते बल्कि पेड़ों की डालियों से छलांग लगाने के बाद हवा में तैरते हैं. वैज्ञानिक इन्हें क्राइसोपेलिया वंश के तहत वर्गीकृत करते हैं. यह सांपों का ऐसा समूह है जो रेनफॉरेस्ट में पेड़ों के बीच हवा में घूमने के लिए पहचाना जाता है.
उड़ने वाले सांपों की सबसे खास बात यह है कि हवा में तैरते समय वे अपने शरीर को चपटा कर लेते हैं. जैसे ही वे छलांग लगाते हैं वे अपनी पसलियों को बाहर की तरफ फैला लेते हैं. इससे उनका सामान्य शरीर एक रिबन जैसा आकार ले लेता है.
उड़ने वाले सांप एक ही छलांग में 10 से 30 मीटर तक की दूरी तय कर सकते हैं. साथ ही अनुकूल परिस्थितियों में कभी-कभी इससे भी ज्यादा दूरी तक जा सकते हैं. हवा में चलते समय वे अपने शरीर को लहरदार S के आकार में मोड़ते और लहराते हैं. इससे उन्हें दिशा बदलने और संतुलन बनाए रखने में मदद मिलती है.
उड़ने वाले सांपों में हल्का जहर होता है. लेकिन इसे इंसानों के लिए खतरनाक नहीं माना जाता. इनकी जहर ग्रंथियां मुंह के पिछले हिस्से में होती है. ये मुख्य रूप से छिपकली, मेंढक, पक्षी और चूहों जैसे छोटे शिकार को बेसुध करने के लिए अपने जहर का इस्तेमाल करते हैं. इनके काटने से हल्की जलन या फिर सूजन हो सकती है.
ये सांप मुख्य रूप से भारत, श्रीलंका, थाईलैंड, इंडोनेशिया, मलेशिया और फिलिपींस जैसे देशों के जंगलों में पाए जाते हैं. भारत में इन्हें आमतौर पर दक्षिण भारत, उड़ीसा, बिहार, मध्य भारत और पूर्वी घाट के साथ-साथ पश्चिमी घाट के आसपास के जंगली इलाकों में देखा जाता है.
वैज्ञानिकों ने उड़ने वाले सांपों की पांच ज्ञात प्रजातियों की पहचान की है. इनमें से पैराडाइज ट्री स्नेक सबसे ज्यादा मशहूर हैं.