Clouds Thunder: क्या सच में गरजने वाले बादल बरसते नहीं, क्या है इस कहावत के पीछे का साइंस?

Clouds Thunder: काले बादल, बिजली की चमक और जोरदार गरज अक्सर लोगों को सोचने पर मजबूर कर देती है कि भारी बारिश होने वाली है. लेकिन इसके बावजूद भी कई बार आसमान घंटों तक सिर्फ गरजता रहता है और जमीन पर बारिश की एक बूंद भी नहीं गिरती. इसी से जुड़ी हुई आपने एक कहावत भी सुनी होगी कि गरजने वाले बादल बरसते नहीं हैं. आइए जानते हैं कि क्या है इसके पीछे की सच्चाई.
गरज तब पैदा होती है जब बिजली तेजी से आस-पास की हवा को लगभग 30000 डिग्री सेल्सियस तक गर्म कर देती है. इससे हवा तेजी से फैलती है और एक शक्तिशाली साउंड वेव पैदा होती है. वहीं बारिश तब होती है जब बादलों के अंदर पानी की बूंद इतनी भारी हो जाती हैं कि वे जमीन की तरफ गिरने लगती हैं.
गर्म और शुष्क इलाकों में ऊंचे क्युमुलोनिम्बस बादल जबरदस्त बिजली और गरज पैदा कर सकते हैं. हालांकि इन बादलों के अंदर बारिश बनती है लेकिन जमीन तक पहुंचने से पहले ही बूंद भाप बनकर उड़ जाती है. ऐसा इसलिए क्योंकि निचला वायुमंडल काफी ज्यादा गर्म और सूखा होता है.
वैज्ञानिक इस घटना को विर्गा कहते हैं. इसमें बादलों से बारिश की लकीरें गिरती हुई तो दिखती हैं लेकिन जमीन को छूने से पहले ही गायब हो जाती हैं. जमीन पर लोगों को गरज तो सुनाई देती है लेकिन बारिश का अनुभव नहीं हो पाता.
मापी जा सकने वाली बारिश के लिए बादलों को पर्याप्त नमी और अनुकूल वायुमंडल की स्थिति की जरूरत होती है. अगर नमी कम हो तो गिरता हुआ ज्यादातर पानी नीचे आते ही भाप बनकर उड़ जाता है.
कभी-कभी तूफान का बारिश करने वाला हिस्सा कई किलोमीटर दूर होता है. इसी के साथ उसके ऊपरी बदल सिर के ऊपर तक फैले होते हैं. यही वजह है कि लोग साफ तौर पर गरज सुन सकते हैं, अब भले ही बारिश किसी दूसरी जगह हो रही हो.
आधुनिक मौसम विज्ञान से यह पता चलता है कि ज्यादातर तूफान कहीं ना कहीं बारिश जरूर करते हैं. हालांकि सूखी हवा, वाष्पीकरण या फिर तूफान की दूरी के कारण वह बारिश देखने वाले लोगों तक कभी नहीं पहुंच पाती.