Bear Attack Survival: क्या सांस रोक कर लेट जाने से भालू सच में नहीं करता हमला, जानें क्या है इसके पीछे का सच?

Bear Attack Survival: आपने यह जरूर सुना होगा कि भालू के हमले से बचने के लिए लेट जाना और सांस रोक लेनी चाहिए. फिल्म, सर्वाइवल गाइड और सोशल मीडिया पर अक्सर ही यह सलाह दी जाती रही है. आइए जानते हैं क्या है इसके पीछे का सच.
भालू के सुनने की शक्ति काफी ज्यादा तेज होती है और वह इंसान के शरीर की गंध, हल्की हलचल और दूसरे शारीरिक संकेत से पहचान कर सकता है. इस वजह से सिर्फ स्थिर रहकर छिपना नामुमकिन है.
मरे हुए का नाटक करना सिर्फ कुछ खास स्थिति में ही काम आता है. अगर कोई भूरा भालू या फिर ग्रिजली बियर बचाव के लिए हमला करता है तो पेट के बाल लाकर और हाथों से गर्दन के पिछले हिस्से को बचाकर रखने से जानवरों को लग सकता है कि अब आपसे कोई खतरा नहीं है.
काले भालू या फिर इस स्लॉथ बियर के सामने कभी भी मरे होने का नाटक ना करें. वाइल्डलाइफ एक्सपर्ट इन दोनों भालू के सामने लेटने के सलाह बिल्कुल नहीं देते. ऐसा इसलिए क्योंकि यह दोनों ही प्रजातियां हमला जारी रख सकती हैं.
ग्रिजली बियर अक्सर खतरा न महसूस होने पर हमला करना बंद कर देते हैं. लेकिन यह प्रतिक्रिया उनके बचाव वाले व्यवहार से जुड़ी होती है.
भालू इंसान से काफी ज्यादा तेज दौड़ सकता है और पेड़ पर चढ़ने में भी माहिर होता है. इस वजह से ज्यादातर मामलों में भाग कर या फिर पेड़ पर चढ़कर बचना सुरक्षित तरीका नहीं है.
भालू की प्रजाति के आधार पर बचने के तरीके अलग-अलग होते हैं. इस वजह से आम धारणा पर भरोसा करने के बजाय एक्सपर्ट्स की सुरक्षा गाइडलाइंस के बारे में जानकारी होना काफी ज्यादा असरदार होगा.