क्या अंतरिक्ष यात्रा के बाद सूसू-पॉटी के बैग धरती पर वापस लाते हैं एस्ट्रोनॉट्स, क्या होता है इनका?
अंतरिक्ष यात्रा जितनी रोचक होती है, उतनी ही रोचक अंतरिक्ष यात्रियों की जिंदगी भी होती है. स्पेस ट्रैवल के दौरान उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, ऐसे में कई लोग अंतरिक्ष यात्रियों की जिंदगी और उनके रहन-सहन के बारे में जानना चाहते हैं.
दरअसल, अंतरिक्ष में न तो वायुमंडल होता है और न ही गुरुत्वाकर्षण. ऐसे में स्पेस यान में खाने से लेकर नहाने तक हर कदम पर नई चुनौती होती है. ऐसी ही एक चुनौती है अंतरिक्ष में महीनों तक रहने वाले अंतरिक्ष यात्रियों को सुसु-पॉटी करना और उसे सही तरह से डिस्पोज करना.
एक समय तक अंतरिक्ष यात्रियों के लिए स्पेस में टॉयलेट की अलग से व्यवस्था नहीं थी, ऐसे में उन्हें अपने स्पेस सूट में ही टॉयलेट करनी पड़ती थी, जो काफी चुनौती भरा था. इस समस्या से निपटने के लिए नासा ने जीरो-ग्रैविटी टॉयलेट बनाए.
इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन में इन्हीं टॉयलेट का प्रयोग किया जाता है, जो पेशाब को वाटर रिसाइक्लिंग के जरिए पीने योग्य पानी में बदलता है, वहीं पॉटी को कंप्रेस करके डंप कर दिया जाता है.
नासा के अनुसार, अंतरिक्ष में समय बिताने के दौरान इकट्ठा हुए कूड़े और इंसानी मल को एक बैग में भरा जाता है, जब इसका वजन दो टन का हो जाता है तो इसे एक स्पेसशिप के माध्यम से धरती की तरफ वापस भेज जाता है. गुरुत्वाकर्षण से पैदा हुए घर्षण से सारा कूड़ा जलकर राख हो जाता है.