Animal Behavior: क्या जानवरों को पहले ही हो जाती है आंधी-तूफान की आहट, ये बात कितनी सच?

Animal Behavior: अक्सर यह कहा जाता है कि जानवर तूफान आने से पहले ही उसे भांप लेते हैं. लेकिन जानवरों के पास कोई जादुई शक्तियां नहीं होती, बल्कि उनकी इंद्रियां हमारी तुलना में कहीं ज्यादा तेज होती हैं. आइए जानते हैं कि आखिर जानवर पर्यावरण में होने वाले छोटे से छोटे बदलाव को समय से पहले कैसे पहचान लेते हैं.
तूफान आने से पहले वायुमंडलीय दबाव कम होने लगता है और जानवर इसे पहचानने में माहिर होते हैं. कुत्ते, बिल्ली और पक्षी इस बदलाव को उन तरीकों से महसूस कर सकते हैं जिन्हें इंसान नहीं कर सकते. इससे वे अक्सर बेचैन या फिर अशांत हो जाते हैं.
कई जानवर काफी कम फ्रीक्वेंसी वाली आवाजों को पहचान सकते हैं. इन्हें इन्फ्रासाऊंड कहा जाता है. इस आवाज को इंसान बिल्कुल भी नहीं सुन सकते. यह आवाज लंबी दूरी तक जा सकती हैं. इसका मतलब है कि जानवर सैकड़ों किलोमीटर दूर से ही गड़गड़ाहट या फिर समुद्र में होने वाली हलचल को सुन सकते हैं.
कुत्तों में सूंघने की शक्ति काफी ज्यादा मजबूत होती है. वे बिजली गिरने से पैदा होने वाली ओजोन को या फिर हवा के साथ बहकर आने वाली बारिश की महक को भी पहचान सकते हैं. इससे वे तूफान के बनने का अंदाजा तब भी लगा सकते हैं जब आसमान बिल्कुल साफ दिखाई दे रहा होता है.
जैसे-जैसे तूफान नजदीक आता है हवा में स्टैटिक बिजली जमा होने लगती है. जानवर इसे अपनी त्वचा या फिर रोएंदार शरीर के जरिए महसूस कर सकते हैं. इससे उन्हें बेचैनी या फिर जलन हो सकती है. यही वजह है कि पालतू जानवर अचानक से घबराए हुए लगते हैं.
जानवर सिर्फ तूफान को महसूस नहीं करते बल्कि उस पर प्रतिक्रिया भी देते हैं. कुत्ते और बिल्ली बेचैन हो जाते हैं, भौंकने लगते हैं या फिर छिपने के लिए सुरक्षित जगह ढूंढते हैं.
यह सिर्फ पालतू जानवर तक ही सीमित नहीं है. कई जीव जंतु तूफान से जुड़े व्यवहार दिखाते हैं. पक्षी अचानक चुप हो सकते हैं या फिर उड़कर सुरक्षित जगहों पर जा सकते हैं. इसी के साथ चीटियां बाढ़ से बचने के लिए अपने अंडों को ऊंची जमीन पर ले जाना शुरू कर देती हैं.