✕
  • होम
  • इंडिया
  • विश्व
  • उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड
  • बिहार
  • दिल्ली NCR
  • महाराष्ट्र
  • राजस्थान
  • मध्य प्रदेश
  • हरियाणा
  • पंजाब
  • झारखंड
  • गुजरात
  • छत्तीसगढ़
  • हिमाचल प्रदेश
  • जम्मू और कश्मीर
  • इलेक्शन
  • बॉलीवुड
  • ओटीटी
  • टेलीविजन
  • तमिल सिनेमा
  • भोजपुरी सिनेमा
  • मूवी रिव्यू
  • रीजनल सिनेमा
  • क्रिकेट
  • आईपीएल
  • कबड्डी
  • हॉकी
  • WWE
  • ओलिंपिक
  • धर्म
  • राशिफल
  • अंक ज्योतिष
  • वास्तु शास्त्र
  • ग्रह गोचर
  • एस्ट्रो स्पेशल
  • बिजनेस
  • हेल्थ
  • रिलेशनशिप
  • ट्रैवल
  • फ़ूड
  • पैरेंटिंग
  • फैशन
  • होम टिप्स
  • GK
  • टेक
  • ट्रेंडिंग
  • शिक्षा

क्या मुस्लिम वाकई उल्टे तवे पर बनाते हैं रोटियां, आखिर क्या है इस रिवाज की वजह?

निधि पाल   |  24 Mar 2026 06:25 PM (IST)
1

पश्चिमी उत्तर प्रदेश और हरियाणा के मुस्लिम परिवारों में ऐतिहासिक रूप से इस तरह के तवे का इस्तेमाल काफी ज्यादा देखा गया है. इन क्षेत्रों की खान-पान संस्कृति में चावल के मुकाबले रोटियों को अधिक प्राथमिकता दी जाती है. यहां बनाई जाने वाली रोटियों का आकार आम रोटियों की तुलना में काफी बड़ा होता है.

Continues below advertisement
2

बड़े आकार की इन रोटियों को सामान्य छोटे और सीधे तवों पर सेंकना काफी मुश्किल काम होता है, क्योंकि आंच पूरी रोटी तक एक समान नहीं पहुंच पाती है. इसी समस्या के समाधान के रूप में एक खास बनावट वाले तवे का जन्म हुआ, जिसे आज लोग उल्टा तवा कहते हैं.

Continues below advertisement
3

जिसे लोग उल्टा तवा समझकर भ्रमित होते हैं, वह वास्तव में अपनी बनावट में ही वैसा होता है. इसे तकनीकी रूप से गोल तवा या गुंबदकार तवा कहा जाता है. इसे चूल्हे पर इस तरह रखा जाता है कि इसका उभरा हुआ हिस्सा ऊपर की ओर रहे. इसकी यह खास बनावट बड़ी रोटियों को चारों तरफ से बराबर सेंकने में मदद करती है.

4

अगर इन बड़ी रोटियों को सीधे तवे पर बनाया जाए, तो वे बीच से तो पक जाती हैं, लेकिन उनके किनारे कच्चे रह जाते हैं. गोल तवे की गर्माहट पूरी सतह पर फैलती है, जिससे रोटी का हर कोना अच्छी तरह सिक जाता है.

5

इस परंपरा की जड़ें अरब देशों के इतिहास से भी जुड़ी मानी जाती हैं, जहां इस्लाम का उदय हुआ. उन क्षेत्रों में सूखी लकड़ियों और ईंधन की भारी कमी थी. वहां के लोगों ने ऊर्जा बचाने के लिए एक अनूठा तरीका निकाला. जब तवे को गुंबद की तरह रखा जाता है, तो आग की लपटें उसके अवतल (धंसे हुए) भाग में टकराकर पूरे तवे में फैल जाती हैं.

6

इससे आंच सीधे बाहर नहीं निकलती और तवा बहुत जल्दी और ज्यादा गर्म होता है. कम से कम ईंधन में अधिक से अधिक रोटियां पकाने के इसी वैज्ञानिक उद्देश्य के कारण इस तरह के तवे का चलन शुरू हुआ. उल्टे तवे पर रोटी बनाने का मुख्य उद्देश्य उपलब्ध ऊर्जा का सर्वाधिक उपयोग करना था.

7

चूल्हे से निकलने वाली अग्नि की लपटें जब इस तरह के तवे की निचली सतह से टकराती हैं, तो वे केंद्र में रुकने के बजाय पूरे तवे के नीचे एक समान गर्मी पैदा करती हैं. प्राचीन समय में जब ईंधन जुटाना एक बड़ी चुनौती थी, तब यह तरीका न केवल समय बचाता था बल्कि रोटियों को मुलायम और स्वादिष्ट भी बनाए रखता था. यह शुद्ध रूप से एक इंजीनियरिंग समाधान था जिसे रेगिस्तानी इलाकों की जरूरतों के हिसाब से ढाला गया था.

  • हिंदी न्यूज़
  • फोटो गैलरी
  • जनरल नॉलेज
  • क्या मुस्लिम वाकई उल्टे तवे पर बनाते हैं रोटियां, आखिर क्या है इस रिवाज की वजह?
Continues below advertisement
About us | Advertisement| Privacy policy
© Copyright@2026.ABP Network Private Limited. All rights reserved.