Diwali 2025: दिवाली ही नहीं दुनिया के हर देश में मनाया जाता है रोशनी का त्योहार, जानें कहां कैसे होता है जश्न
भारत में दिवाली सिर्फ त्योहार नहीं, बल्कि भावनाओं का संगम है. यह अंधकार पर प्रकाश, बुराई पर अच्छाई और अज्ञान पर ज्ञान की जीत का प्रतीक है. इस दिन घर-घर दीप जलाए जाते हैं, माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा होती है और पूरा माहौल खुशियों से भर जाता है. लेकिन दिवाली का जादू केवल भारत तक सीमित नहीं रहा है.
नेपाल में इसे तिहार या स्वान्ति कहा जाता है, जहां पांच दिन तक अलग-अलग रूपों में पूजा की जाती है, पहले दिन गायों की, फिर कुत्तों की और फिर भाई दूज की तरह भाइयों का सम्मान किया जाता है.
वहीं मलेशिया और सिंगापुर में यह त्योहार राष्ट्रीय पहचान बन चुका है, जहां सड़कों पर दीयों की कतारें और रंगीन लाइटों से सजे मंदिर इसकी भव्यता दिखाते हैं. मॉरीशस और फिजी जैसे देशों में भारतीय मूल के लोग इसे पारंपरिक मिठाइयों, संगीत और नृत्य के साथ मनाते हैं.
अब बात करते हैं दुनिया के बाकी हिस्सों की, जहां रोशनी के त्योहारों का अपना ही अलग जादू है. यहूदी समुदाय हनुक्काह नाम से प्रकाश पर्व मनाता है, जो आठ दिनों तक चलता है. यहां हर रात एक नई मोमबत्ती जलाई जाती है और यह त्योहार उस चमत्कार की याद में मनाया जाता है जब तेल का छोटा दीपक आठ दिन तक लगातार जलता रहा था.
ऑस्ट्रेलिया के सिडनी शहर में हर साल Vivid Sydney नाम का शानदार प्रकाश उत्सव होता है. यह 23 दिनों तक चलता है और इस दौरान सिडनी ओपेरा हाउस और हार्बर ब्रिज को रंग-बिरंगी लाइटों से जगमगाया जाता है. संगीत, कला और तकनीक का यह मेल दुनिया भर से लोगों को आकर्षित करता है.
थाईलैंड का यी पेंग महोत्सव भी अद्भुत नजारा पेश करता है. चियांग माई शहर के आसमान में हजारों लालटेनों का उड़ना किसी सपने से कम नहीं लगता है. ये लालटेन आशा, नई शुरुआत और शुभकामना का प्रतीक मानी जाती हैं.
जापान का आओमोरी नेबुता मत्सुरी अगस्त में मनाया जाता है, जिसमें विशालकाय लालटेनें और पारंपरिक नर्तक सड़कों पर उतरते हैं. वहीं स्पेन का लास फेल्लास मार्च में मनाया जाने वाला ऐसा त्योहार है जिसमें लकड़ी और कागज से बनी विशाल मूर्तियों को आग लगाकर रोशनी का अद्भुत प्रदर्शन किया जाता है.