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देश में ब्लॉक कंटेंट देखा तो कितनी मिल सकती है सजा, क्या हैं नियम?

निधि पाल   |  12 Aug 2026 06:13 PM (IST)
देश में ब्लॉक कंटेंट देखा तो कितनी मिल सकती है सजा, क्या हैं नियम?

Blocked Content Viewing Punishment: यूट्यूबर ध्रुव राठी के एक हालिया वीडियो को गूगल ने केंद्र सरकार की शिकायत अपीलीय समिति (GAC) के आदेश के बाद भारत में ब्लॉक कर दिया है. इस वीडियो पर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के आरोप लगे थे. यह वीडियो भले ही भारत के बाहर देखा जा सके, लेकिन देश के भीतर यह ब्लॉक हो चुका है. लेकिन फिर भी वीपीएन की मदद से इसे देखा जा सकता है. ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि अगर कोई भारत में ब्लॉक किया गया कंटेंट या वेबसाइट देखता है, तो देश के नियम-कानून क्या कहते हैं और क्या इसके लिए सजा हो सकती है.

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भारतीय कानून के मुताबिक, केवल किसी ब्लॉक की गई सामान्य वेबसाइट या वीडियो को अपने निजी डिवाइस पर देखने मात्र के लिए आम नागरिक को सीधे तौर पर जेल भेजने का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है.

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बशर्ते वह कंटेंट चाइल्ड पोर्नोग्राफी, आतंकवाद या देश की सुरक्षा से जुड़ा न हो. सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 69A के तहत सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा, लोक व्यवस्था या सार्वजनिक शांति बनाए रखने के लिए किसी भी यूआरएल या वीडियो को भारत में ब्लॉक करने का आदेश दे सकती है.

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यह कानूनी आदेश मुख्य रूप से इंटरनेट सर्विस प्रदाताओं और टेक प्लेटफॉर्म्स के लिए लागू होता है. अपने निजी स्पेस में एडल्ट कंटेंट देखना निजता के अधिकार के तहत आता है, लेकिन ऐसे कंटेंट को शेयर करना या इंटरनेट पर अपलोड करना अपराध है.

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आईटी एक्ट की धारा 67 के तहत इलेक्ट्रॉनिक रूप में अश्लील सामग्री प्रकाशित या प्रसारित करने पर पहली बार दोषी पाए जाने पर 3 साल तक की जेल और 5 लाख रुपये तक के जुर्माने की सजा है.

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वहीं BNS की धारा 294 के तहत सार्वजनिक स्थानों पर अश्लीलता फैलाने पर भी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है. इंटरनेट पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़ा कंटेंट देखना, डाउनलोड करना या डिवाइस में स्टोर करके रखना बेहद गंभीर और गैर-जमानती अपराध है.

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इस मामले में POCSO कानून और आईटी एक्ट की धारा 67B के तहत कड़े प्रावधान लागू होते हैं. इस तरह की सामग्री को देखने या अपने पास रखने पर व्यक्ति को 5 से 7 साल तक की जेल की सजा हो सकती है, साथ ही भारी जुर्माना भी लगाया जाता है.

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कॉपीराइट एक्ट के तहत ब्लॉक की गई साइटों से कोई पाइरेटेड फिल्म या कंटेंट केवल ऑनलाइन देखना एक कानूनी भ्रम है, लेकिन उसे टॉरेंट या अन्य माध्यमों से डाउनलोड करके आगे शेयर करना सीधे तौर पर कॉपीराइट उल्लंघन माना जाता है.

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इसके अलावा, देश की अखंडता और संप्रभुता को खतरा पहुंचाने वाला या साइबर आतंकवाद को बढ़ावा देने वाला कंटेंट देखना और फैलाना बीएनएस के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई के दायरे में आता है.

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