इन देशों में ताउम्र शादी के सपने ही संजोती रह जाती हैं लड़कियां, आखिर क्यों उम्रभर नहीं बन पातीं दुल्हन
दुनिया में शादी को लेकर परंपराएं और जीवनशैली बदल रही हैं. जहां भारत जैसे विकासशील देशों में महिलाएं अक्सर शादी को अपना जीवन लक्ष्य मानती हैं, वहीं कई विकसित देशों में महिलाएं शादी से दूर रहना पसंद करती हैं.
दक्षिण कोरिया, जापान और हॉन्ग कॉन्ग जैसी जगहों पर महिलाएं करियर, स्वतंत्रता और निजी पसंद को शादी से ऊपर रख रही हैं. वहीं रूस, बेलारूस और एस्टोनिया जैसी जगहों पर महिलाओं की शादी न होना पूरी तरह मजबूरी है, न कि सिर्फ च्वाइस.
रूस में महिलाओं और पुरुषों की आबादी में बड़ा अंतर है. कुल आबादी में 53.50% महिलाएं हैं, जबकि पुरुष केवल 46.50% हैं. इसका मतलब यह है कि प्रति 100 महिलाओं पर केवल 86.73 पुरुष उपलब्ध हैं. पुरुषों की इस कमी के कारण कई महिलाएं 30 की उम्र पार कर चुकी हैं और शादी नहीं कर पाती हैं. यही वजह है कि रूस में बर्थ रेट में लगातार गिरावट आ रही है.
रूस की ही तरह बेलारूस और एस्टोनिया में भी पुरुषों की संख्या महिलाओं के मुकाबले कम है. इन देशों में लड़कियों की संख्या अधिक होने के कारण कई महिलाओं को शादी के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है या वे ताउम्र सिंगल रह जाती हैं.
इसी तरह सल्वाडोर में भी सामाजिक और आर्थिक कारणों के चलते महिलाएं विवाह के लिए सही विकल्प नहीं पाती हैं.
हॉन्ग कॉन्ग और जापान में युवा महिलाएं शादी को प्राथमिकता नहीं देती हैं. करियर, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और आर्थिक सुरक्षा इनकी प्राथमिकता है. इस वजह से इन देशों में शादी की उम्र बढ़ रही है और कई महिलाएं जीवनभर सिंगल रह जाती हैं.
इन देशों की सरकारें शादी और बर्थ रेट को बढ़ाने के लिए कई योजना बना रही हैं. रूस में पुरुष आबादी बढ़ाने और विवाह को प्रोत्साहित करने की कोशिश की जा रही है. जापान और दक्षिण कोरिया में आर्थिक प्रोत्साहन और शादी-संबंधी स्कीम शुरू की जा रही हैं, लेकिन सामाजिक मानसिकता और जीवनशैली में बदलाव इसे आसान नहीं बना रहे हैं.