✕
  • होम
  • इंडिया
  • विश्व
  • उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड
  • बिहार
  • दिल्ली NCR
  • महाराष्ट्र
  • राजस्थान
  • मध्य प्रदेश
  • हरियाणा
  • पंजाब
  • झारखंड
  • गुजरात
  • छत्तीसगढ़
  • हिमाचल प्रदेश
  • जम्मू और कश्मीर
  • बॉलीवुड
  • ओटीटी
  • टेलीविजन
  • तमिल सिनेमा
  • भोजपुरी सिनेमा
  • मूवी रिव्यू
  • रीजनल सिनेमा
  • क्रिकेट
  • आईपीएल
  • कबड्डी
  • हॉकी
  • WWE
  • ओलिंपिक
  • धर्म
  • राशिफल
  • अंक ज्योतिष
  • वास्तु शास्त्र
  • ग्रह गोचर
  • एस्ट्रो स्पेशल
  • बिजनेस
  • हेल्थ
  • रिलेशनशिप
  • ट्रैवल
  • फ़ूड
  • पैरेंटिंग
  • फैशन
  • होम टिप्स
  • GK
  • टेक
  • ट्रेंडिंग
  • शिक्षा

इस देश में बदल रहा कुत्तों का रंग, 39 साल पहले हुई त्रासदी का अब क्यों हो रहा असर?

निधि पाल   |  28 Oct 2025 06:25 PM (IST)
1

यूक्रेन का चेरनोबिल, जिसे कभी दुनिया का सबसे खतरनाक इलाका कहा जाता था, एक बार फिर चर्चा में है, लेकिन इस बार वजह हैरान करने वाली है. यहां घूमने वाले कुत्तों का रंग अचानक बदल गया है.

Continues below advertisement
2

कुछ कुत्ते पूरी तरह नीले नजर आए हैं, जबकि कुछ के फर पर नीली परत साफ दिखाई दे रही है. इस घटना ने वैज्ञानिकों और स्थानीय अधिकारियों दोनों को चौंका दिया है.

Continues below advertisement
3

दरअसल, ये वही कुत्ते हैं जो 1986 में हुई चेरनोबिल परमाणु आपदा के बाद पीछे छूट गए जानवरों की अगली पीढ़ी हैं. करीब 18 वर्ग मील के निषिद्ध क्षेत्र में आज लगभग 700 कुत्ते रहते हैं. इनकी देखभाल करने वाले स्वयंसेवी समूहों ने हाल ही में एक वीडियो साझा किया, जिसमें कुछ कुत्ते नीले फर में नजर आए.

4

पोस्ट में लिखा था, ‘पिछले हफ्ते ये नीले नहीं थे, हमें नहीं पता यह कैसे हुआ, लेकिन हम जांच कर रहे हैं.’ पहले तो लोगों ने इसे रेडिएशन का असर माना, लेकिन वैज्ञानिकों ने तुरंत इस संभावना से इंकार नहीं किया.

5

वैज्ञानिकों ने कहा है कि केमिकल एक्सपोजर की आशंका भी उतनी ही मजबूत है. संभव है कि कुत्ते किसी औद्योगिक कचरे, धातु या कॉपर सल्फेट जैसे रासायनिक पदार्थ के संपर्क में आए हों.

6

विशेषज्ञों का कहना है कि चेरनोबिल क्षेत्र में अब भी कई पुरानी फैक्ट्रियों के अवशेष हैं. हो सकता है कुत्तों ने किसी ऐसे स्थान पर आश्रय लिया हो जहां किसी केमिकल का रिसाव हुआ हो. हालांकि अभी तक किसी भी कुत्ते को पकड़कर उनकी जांच नहीं की जा सकी है.

7

जैसे ही कुछ सैंपल मिलेंगे, तभी यह साफ हो पाएगा कि यह परिवर्तन जैविक है या सिर्फ बाहरी रासायनिक प्रभाव. वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर यह बदलाव रेडिएशन से जुड़ा है तो यह एक बड़ी खोज साबित हो सकती है, क्योंकि इसका मतलब होगा कि चेरनोबिल का इकोसिस्टम अब भी जेनेटिक परिवर्तन झेल रहा है.

  • हिंदी न्यूज़
  • फोटो गैलरी
  • जनरल नॉलेज
  • इस देश में बदल रहा कुत्तों का रंग, 39 साल पहले हुई त्रासदी का अब क्यों हो रहा असर?
Continues below advertisement
About us | Advertisement| Privacy policy
© Copyright@2026.ABP Network Private Limited. All rights reserved.