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क्या स्नाइपर की गोली से भी बचा सकता है पानी, जानें क्यों होता है ऐसा?

एबीपी लाइव   |  03 Jan 2026 01:19 PM (IST)
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पानी और हवा में सबसे बड़ा अंतर उनकी डेंसिटी है पानी, हवा से लगभग 800 गुना ज्यादा घना होता है. हवा में गोली आसानी से निकल जाती है, लेकिन पानी में उसे बहुत ज्यादा रुकावट मिलती है. जो चीज हवा में आसानी से निकल जाती है, वहीं पानी में फंस जाती है.

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गोली जितनी तेज चलती है, पानी उसे उतनी ही जोर से रोकता है. गोली की स्पीड बढ़ने पर घर्षण बल (Drag Force) बहुत तेजी से बढ़ता है. इसलिए स्नाइपर राइफल जैसी तेज गोलियां पानी में घुसते ही जोरदार झटका खाती हैं. यही वजह है कि तेज स्पीड गोलियां अक्सर पानी में घुसते ही टूट जाती हैं. जबकि धीमी पिस्तौल की गोलियां थोड़ी ज्यादा दूर जा पाती हैं.

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आमतौर पर पानी को तरल माना जाता है, लेकिन जब कोई चीज बहुत तेज स्पीड से पानी से टकराती है तो पानी के मॉलिक्यूल्स को हटने का समय नहीं मिलता है. इस स्थिति में पानी कुछ पलों के लिए ठोस दीवार जैसा व्यवहार करता है. इसी कारण गोली पर अचानक बहुत ज्यादा दबाव पड़ता है और वह टूट सकती है या अपना रास्ता बदल सकती है.

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पानी बहुत ज्यादा दबाया (compress) नहीं जा सकता है. गोली जब पानी में जाती है, तो एक तेज दबाव लहर (Shock Wave) बनती है. यह लहर पानी में ध्वनि की स्पीड से फैलती है, जो हवा से लगभग 4 गुना तेज होती है. इसका असर यह होता है कि गोली की एनर्जी अचानक खत्म होने लगती है. कुछ ही मिलीसेकंड में उस पर हजारों से लाखों न्यूटन का बल लग सकता है.

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हर गोली एक जैसी नहीं होती है. जैसे नुकीली और पतली गोली, गोल और चौड़ी गोली इन दोनों का पानी में असर अलग होता है. जिन गोलियों का आगे का हिस्सा नुकीला हो और सामने का क्षेत्रफल कम हो वे पानी में थोड़ा ज्यादा अंदर जा सकती हैं. लेकिन फिर भी कोई भी गोली पानी में बहुत दूर तक नहीं जाती है.

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रिसर्च के अनुसार तेज स्पीड स्नाइपर गोलियां 1–3 फीट पानी में ही टूट जाती हैं या जानलेवा नहीं रहती हैं. वहीं धीमी पिस्तौल गोलियां 5–8 फीट तक जा सकती हैं. लेकिन उसके बाद नुकसान नहीं कर पाती है.

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